Satya Report: वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नीलकंठ तिवारी को लेकर चर्चा का बाजार गरमाया हुआ है। दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2829 अप्रैल को बाबा विश्वनाथ की धरती काशी में रहे। अपने संसदीय क्षेत्र में पहुंचने के बाद उन्होंने महिला सम्मेलन में भाग लिया। वहीं, दौरे के दूसरे दिन 29 अप्रैल बुधवार को बाबा विश्वनाथ के धाम में पहुंचे। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए मंत्री, विधायक और मेयर खड़े थे। पीएम मोदी हाथ जोड़कर बारीबारी से सभी का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। नीलकंठ तिवारी ने भी हाथ जोड़कर स्वागत किया तो प्रधानमंत्री ने उनका एक हाथ पकड़कर नीचे झुकाया और पीठ थपथपाई। मुस्कुराते हुए कुशलक्षेम पूछा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वारयल हो रहा है।

कौन हैं नीलकंठ तिवारी?
नीलकंठ तिवारी वाराणसी शहर दक्षिणी विधानसभा सीट से विधायक हैं। नीलकंठ तिवारी ने पहली बार यूपी चुनाव 2017 में इस सीट से चुनाव लड़ा। उन्हें भाजपा के दिग्गज नेता और सात बार से विधायक रहे श्यामदेव राय चौधरी के स्थान पर उम्मीदवार बनाया गया था। श्यामदेव राय चौधरी का टिकट कटने और नीलकंठ तिवारी को टिकट मिलने पर राजनीति भी खूब गरमाई।
यूपी चुनाव 2017 के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन दिनों तक वाराणसी में कैंप किया था। इसके पीछे की वजह नीलकंठ तिवारी को क्षेत्र में स्थापित करना और चुनाव जिताना माना गया। चुनाव में नीलकंठ तिवारी ने राजेश मिश्र को 16000 से अधिक वोटों से हरा दिया। इसके बाद योगी सरकार में वे राज्यमंत्री भी बने।
देवरिया के हैं मूल निवासी
नीलकंठ तिवारी मूल रूप से देवरिया के रहने वाले हैं। उनका जन्म ओंकारनाथ तिवारी और लाली देवी के परिवार में हुआ था। उनके पिता पुलिस विभाग में थे। उनकी पत्नी पूनम तिवारी और परिवार में एक बेटी और बेटा है। देवरिया में ही प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे वाराणसी पहुंचे। नीलकंठ तिवारी ने हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज से बीएससी और एलएलबी किया। इसके बाद एकात्म मानववाद एवं सोशल इंजीनियरिंग विषय से पीएचडी की उपाधि हासिल की।
छात्र राजनीति से शुरुआत
नीलकंठ तिवारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की। वे वर्ष 1989 में हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज छात्र संघ के महामंत्री बने। वे पेशे से वकील हैं। वे वर्ष 2014 में सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने विनायका वार्ड से पार्षदी का चुनाव भी लड़ा था। हालांकि, इस चुनाव में हार मिली थी। उन्हें वाराणसी में पीएम मोदी के करीबी नेताओं में गिना जाता है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी पीठ पीएम मोदी की ओर से ठोंके जाने को लेकर काशी में राजनीतिक चर्चा खूब गरमाई हुई है।



