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Prabhasakshi NewsRoom: Hormuz में जंग का बिगुल! Iran का UAE पर बड़ा हमला, America ने किया पलटवार

पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है, जब ईरान ने संघर्ष विराम लागू होने के बाद पहली बार संयुक्त अरब अमीरात पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती दी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी गहरा प्रभाव डाला है। सोमवार को हुए इस हमले में ईरान ने कई मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिनमें से अधिकांश को संयुक्त अरब अमीरात की वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया। हालांकि कुछ हमले सफल रहे, जिनमें फुजैरा के एक महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान पर ड्रोन गिरा, जिससे आग लग गई और तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। इन घायलों की स्थिति गंभीर बताई गई है और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब जलडमरूमध्य हरमुज को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि विश्व के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर नियंत्रण और अमेरिका द्वारा इसे खोलने के प्रयास ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

Prabhasakshi NewsRoom: Hormuz में जंग का बिगुल! Iran का UAE पर बड़ा हमला, America ने किया पलटवार
Prabhasakshi NewsRoom: Hormuz में जंग का बिगुल! Iran का UAE पर बड़ा हमला, America ने किया पलटवार
इस बीच, अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरानी हमलों को नाकाम करते हुए कई ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया और छह ईरानी नौकाओं को नष्ट कर दिया, जो नागरिक जहाजों को निशाना बना रही थीं। अमेरिकी कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, उनकी सेना ने हर खतरे को सफलतापूर्वक विफल किया और समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाया।
साथ ही अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नामक अभियान के तहत फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मानवीय पहल बताया है, जिसका उद्देश्य उन जहाजों और नाविकों की सहायता करना है जो कई दिनों से खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। हालांकि, ईरान ने इस कदम को संघर्ष विराम का उल्लंघन बताते हुए इसका विरोध किया है। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज की आवाजाही उसकी अनुमति के बिना संभव नहीं है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि किसी भी विदेशी सैन्य बल द्वारा इस क्षेत्र में प्रवेश करने पर उसे निशाना बनाया जाएगा। इसके साथ ही ईरान ने अपने नियंत्रण क्षेत्र का विस्तार दिखाते हुए एक नक्शा भी जारी किया है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात के तटों तक उसका प्रभाव बताया गया है।
दूसरी ओर, संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के इस हमले की कड़ी निंदा की है। वहां के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और समुद्री मार्ग को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करना समुद्री डकैती के समान है। उधर, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया ने भी अपने जहाजों पर हमलों की पुष्टि की है। कुछ जहाजों में आग लगने और विस्फोट की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने फिलहाल इस मार्ग से गुजरने से इंकार कर दिया है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे वहां की आंतरिक राजनीति पर भी दबाव बढ़ रहा है।
भारत ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है, खासकर इसलिए क्योंकि हमले में उसके तीन नागरिक घायल हुए हैं। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, हिंसा रोकने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। साथ ही उसने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जलमार्ग में निर्बाध व्यापार और आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि रणनीतिक नियंत्रण का भी है। जहां अमेरिका अपनी नौसैनिक ताकत के बल पर समुद्री मार्ग खोलना चाहता है, वहीं ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति और सैन्य संसाधनों के जरिए इस क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखना चाहता है। हालांकि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ताजा घटनाओं ने इन प्रयासों को कमजोर कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और केवल बातचीत ही इसका रास्ता है। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह संकट एक बार फिर वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। यदि जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका प्रभाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर गंभीर हो सकता है।

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