विदेशी निवेशकों के मुकाबले में देसी यानी घरेलू निवेशकों ने शेयर बाजार में जमकर निवेश किया है. जिसकी वजह से उन्होंने एक नया कीर्तिमान बना डाला है. मंगलवार को मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटीज पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. मार्च तिमाही में निफ्टी 500 कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 20.9 प्रतिशत हो गई, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 17.1 प्रतिशत रह गई. रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 26 में भारतीय शेयर बाजार अस्थिर रहे. इसकी मुख्य वजह वैश्विक अनिश्चितताएं थीं, खासकर ईरानइजरायल/अमेरिका संघर्ष से पैदा हुआ भूराजनीतिक तनाव, हालाँकि, घरेलू निवेश प्रवाह ने बाजार को मजबूत सहारा दिया.

देसी निवेशकों का निवेश
DIIs ने बाजार को लगातार सहारा दिया और जनवरीमार्च 2026 की अवधि में 27.2 अरब डॉलर का निवेश किया. इसमें स्थिर सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान प्रवाह का भी योगदान रहा. इसके विपरीत, FIIs का निवेश प्रवाह अस्थिर रहा. इस तिमाही के दौरान 15.8 अरब डॉलर की बिकवाली की. इसमें मार्च महीने में भूराजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण की गई 14.2 अरब डॉलर की भारी बिकवाली भी शामिल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बार जब युद्ध का माहौल शांत हो जाएगा, तो FIIs के निवेश प्रवाह में सुधार की प्रबल संभावना है. यहां तक कि यदि बिकवाली में कमी भी आती है, तो बाज़ार इसे सकारात्मक रूप से लेगा. वहीं, यदि निवेश प्रवाह पूरी तरह से सकारात्मक हो जाता है, तो बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है.
हिस्सेदारी में आया बदलाव
मार्च 2026 में निफ्टी 500 में FIIDII हिस्सेदारी का अनुपात घटकर 0.8 गुना रह गया, जो संस्थागत स्वामित्व में आए एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि ‘फ्रीफ्लोट’ के आधार पर FIIs की हिस्सेदारी घटकर 33.8 प्रतिशत रह गई, जबकि DIIs की हिस्सेदारी बढ़कर 41.2 प्रतिशत हो गई. पिछले वर्ष की तुलना में , मार्च 2026 में निफ्टी 500 में DIIs की हिस्सेदारी 170 आधार अंक बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 20.9 प्रतिशत पर पहुंच गई. इसके विपरीत, FIIs की हिस्सेदारी एक साल पहले के 18.9 प्रतिशत से घटकर 17.1 प्रतिशत रह गई.
DIIs ने कहां किया ज्यादा निवेश
प्रमोटर्स की हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही और 49.4 फीसदी पर बनी रही, जबकि इसी अवधि के दौरान रिटेल निवेशकों की भागीदारी थोड़ी बढ़कर 12.7 प्रतिशत हो गई. सेक्टर के हिसाब से, DIIs ने 24 में से 21 सेक्टरों में अपना निवेश बढ़ाया है. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी प्राइवेट बैंकों, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और NBFCलेंडिंग सेगमेंट में देखी गई. हालांकि, EMS, NBFC और मेटल्स जैसे सेक्टरों में DII की हिस्सेदारी में गिरावट आई. FII के निवेश के रुझानों से पता चला कि BFSI सेगमेंट में उनका निवेश कम हुआ है, जो घटकर 32.1 प्रतिशत रह गया. वहीं, मेटल्स, हेल्थकेयर, यूटिलिटीज और ऑयल एंड गैस सेक्टर में उनका निवेश बढ़ा है. खास बात यह है कि मार्च 2026 में टेक्नोलॉजी सेक्टर में FII का निवेश घटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 7.3 प्रतिशत पर आ गया.
DIIs की बाजार में अहम भूमिका
रिपोर्ट में बताया गया है कि Nifty 500 के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की हिस्सेदारी क्रमशः 67 प्रतिशत, 22 प्रतिशत और 11 प्रतिशत रही. DIIs ने प्राइवेट और PSU, दोनों ही सेगमेंट में अपना निवेश बढ़ाया है, जो अब क्रमशः 21.5 प्रतिशत और 17.5 प्रतिशत हो गया है. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि बाजार में आने वाले उतारचढ़ाव को संभालने में घरेलू निवेशक लगातार अहम भूमिका निभा रहे हैं. अगर FII का पैसा बाहर जाना थोड़ा भी कम होता है, या फिर से बाज़ार में पैसा आना शुरू हो जाता है, तो इससे इक्विटी बाज़ारों को और भी ज्यादा सहारा मिल सकता है.



