Hantavirus News In Hindi: दुनिया अभी कोरोना महामारी के असर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब एक और जानलेवा वायरस ‘हंतावायरस’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अर्जेंटीना से रवाना हुए एक डच क्रूज शिप ‘एमवी होंडियस’ पर इस वायरस के फैलने से तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन अलर्ट मोड पर आ गया और दुनिया भर के वैज्ञानिकों में इस वायरस के व्यवहार को लेकर बहस छिड़ गई है।

क्या यह कोरोना जैसी महामारी है?
जैसे ही क्रूज शिप पर मौतों की खबर आई, दुनिया भर को एक नई महामारी का डर सताने लगा। हालांकि, WHO के प्रमुख ने हालिया मीडिया ब्रीफिंग में इस डर को खारिज कर दिया है। संगठन ने साफ शब्दों में कहा है कि हंतावायरस कोई नया वायरस नहीं है और न ही यह कोविड19 जैसी महामारी की स्थिति है। WHO के अनुसार, यह वैसी स्थिति नहीं है जैसी दुनिया ने छह साल पहले देखी थी और इसके अगर कुल जोखिम को देखें तो अभी यह ना के बराबर है।
कैसे शुरू हुआ संक्रमण?
ने बताया कि इस क्रूज शिप से जुड़े अब तक कुल 8 मामले सामने आए हैं, जिनमें से पांच में हंतावायरस की पुष्टि हो चुकी है और तीन संदिग्ध हैं। संक्रमण की शुरुआत 6 अप्रैल को हुई थी। जब एक पुरुष यात्री में लक्षण देखे गए और 11 अप्रैल को जहाज पर ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद, एक अन्य संक्रमित व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग पहुंचा, जहां उसकी भी जान चली गई। स्विट्जरलैंड में भी एक मामला सामने आने की रिपोर्ट है।
हंतावायरस, इन्फोग्राफिक
12 देशों को किया गया अलर्ट
इस खतरे की गंभीरता को देखते हुए WHO ने उन 12 देशों को आधिकारिक तौर पर अलर्ट जारी किया है, जिनके नागरिक सेंट हेलेना में इस जहाज से उतरे थे। इन देशों में ब्रिटेन, , कनाडा, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर और तुर्किये जैसे प्रमुख राष्ट्र शामिल हैं। फिलहाल, डच डॉक्टरों और यूरोपीय रोग निवारण विशेषज्ञों की एक टीम जहाज पर मौजूद सभी लोगों की मेडिकल जांच कर रही है।
क्या है हंतावायरस के लक्षण?
हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों के संपर्क में आने, उनके सलाइवा, पेशाब या मल के जरिए फैलता है। हालांकि, कुछ विशेष स्ट्रेन, जैसे कि 2018 में अर्जेंटीना में देखा गया था, बंद जगहों पर इंसानों से इंसानों में भी फैल सकते हैं। इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं जिसमें बुखार, बदन दर्द और कमजोरी होती है लेकिन अचानक स्थिति बिगड़ने लगती है।
वायरस फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर देता है, जिससे उनमें तरल पदार्थ भरने लगता है और मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ होती है। गंभीर मामलों में मरीज की जान बचाने के लिए ECMO मशीन की आवश्यकता पड़ती है। WHO ने जोर देकर कहा है कि वायरस की इनक्यूबेशन अवधि 6 हफ्ते तक हो सकती है, इसलिए आने वाले दिनों में कुछ और मामले सामने आ सकते हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है।



