Jabalpur News: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन क्षेत्र में रबी सीजन के तहत गेहूं की सरकारी खरीदी के दौरान अव्यवस्था और लापरवाही के आरोप सामने आए हैं. पाटनजुगिया मार्ग पर लगभग 150 ट्रॉलियों की लंबी कतार लगी है और किसान पिछले चार से पांच दिनों से अपनी उपज लेकर सड़क किनारे डटे हुए हैं. भीषण गर्मी के बीच किसानों को न पीने के पानी की समुचित व्यवस्था मिल रही है और न ही ठहरने की. महुआखेड़ा, पाटन, बजरंगगढ़ और कुंवरपुर सहित आसपास के कई गांवों के किसान अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

किसानों ने बताई परेशानी
किसानों का कहना है कि उन्हें रात भर जागकर अपनी फसल की निगरानी करनी पड़ रही है, ताकि चोरी की आशंका न रहे. किसान बलदेव सिंह ठाकुर ने बताया कि कई दिनों से सड़क पर इंतजार करने के बावजूद खरीदी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है. स्थानीय किसानों के अनुसार, परमपिता वेयरहाउस की क्षमता पूरी तरह भर चुकी है. इसके ठीक बगल में स्थित श्री माता वेयरहाउस खाली है और संचालक ने वहां खरीदी के लिए सहमति भी दी है.
इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा नए वेयरहाउस की मैपिंग नहीं की जा रही है. किसानों ने खाद्य विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है और कहा है कि वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें अनावश्यक रूप से इंतजार कराया जा रहा है. किसानों के अनुसार, बारदाने की कमी ने समस्या को और बढ़ा दिया है. उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर समय रहते पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई.
कलेक्टर ने क्या कहा?
वहीं जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जिन केंद्रों पर अधिक भीड़ है, वहां से किसानों को उन खरीदी केंद्रों पर स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां स्लॉट उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा कि अब तक जिले में 1.10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है और प्रशासन के अनुसार कोई लंबित स्थिति नहीं है. कलेक्टर ने यह भी कहा कि कुछ खसरों को तकनीकी कारणों से निष्क्रिय किए जाने के कारण भ्रम की स्थिति बनी हो सकती है.
किसानों ने की कार्रवाई की मांग
किसानों का कहना है कि बारिश की आशंका बढ़ रही है और खुले में रखी उपज को नुकसान हो सकता है. उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और तत्काल वैकल्पिक वेयरहाउस को खरीदी प्रक्रिया से जोड़ने की मांग की है. हालांकि पाटन क्षेत्र की स्थिति ने सरकारी खरीदी व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. किसानों का कहना है कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध है तो उन्हें कई दिनों तक सड़क पर इंतजार करने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है?



