Puja Batti Niyam: हिंदू धर्म में सुबहशाम भगवान के समक्ष दीपक जलाया जाता है। इस दीपक में कभी हम गोल बाती लगा देते हैं तो कभी लंबी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शास्त्रों में बाती से जुड़े कुछ जरूरी नियम बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर हम अपनी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं। हम में से अधिकतर लोग ये नहीं जानते होंगे कि किस भगवान की पूजा में कौन सी बाती जलानी चाहिए। अगर आप भी हर जगह गोल बाती ही जला देते हैं तो ये लेख आपके लिए है।

गोल बाती: कब और क्यों जलाएं?
- गोल बाती को फूल बाती भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार ये बाती स्थिरता और ब्रह्म ज्ञान का प्रतीक होती है।
- ये बाती मुख्य रूप से भगवान विष्णु, शिव जी, हनुमान जी, गणेश जी और अन्य देवताओं की पूजा में जलाई जाती है।
- मंदिर में भी भगवान की प्रतिमा के समक्ष गोल बाती ही जलाई जाती है।
- इसके अलावा तुलसी के पौधे के सामने भी गोल बाती जलाना शुभ माना जाता है।
- कहते हैं गोल बाती जलाने से घर में सुखशांति बनी रहती है।
- इस बात का ध्यान रखें कि गोल बाती को हमेशा दीपक के बिल्कुल बीच में रखना चाहिए।
लंबी बाती: कब और क्यों जलाएं?
- मां लक्ष्मी, मां काली, मां दुर्गा समेत अन्य सभी देवियों की पूजा में लंबी बाती का प्रयोग किया जाता है।
- बता दें देवी की पूजा विस्तार और उन्नति के लिए की जाती है इसलिए इनकी पूजा में लंबी बाती जलाई जाती है।
- लंबी बाती का मतलब है चीज बढ़ेगी यानी उसका विस्तार होगा।
- ऐसे में जब आप लंबी बाती का दीपक जलाकर पूजा करते हैं तो इससे वंश, संपन्नता और समृद्धि में विस्तार होता है।
- शास्त्रों में लंबी बाती को वंश वृद्धि और लक्ष्मी माता का प्रतीक माना गया है।
- इसके अलावा पूर्वजों के निमित्त जलाए जाने वाले दीपक में भी लंबी बाती ही जलानी चाहिए।
99% लोग करते हैं ये बड़ी गलती?
अक्सर लोग माता लक्ष्मी के सामने भी गोल बाती ही जला देते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, लक्ष्मी जी का स्वभाव चंचल होता है और ऐसे में अगर उनके सामने गोल बाती जलाएंगे तो इससे धन स्थिर तो होगा लेकिन उसकी वृद्धि रुक जाएगी। यही कारण है कि लक्ष्मी जी के सामने हमेशा लंबी बाती का ही दीपक जलाना चाहिए।
बाती से जुड़े अन्य जरूरी नियम
- बाती हमेशा रुई या लाल मौली की होनी चाहिए।
- देवीदेवताओं की पूजा में घी की बाती जलानी चाहिए तो वहीं पितरों के समक्ष सरसों के तेल की बाती जलानी चाहिए।
- इसके अलावा शनि देव की पूजा में भी सरसों या तिल के तेल की बाती जलाई जाती है।
- कभी भी खराब बाती का प्रयोग न करें।



