Dhar News: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में शुक्रवार को इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे वाग्देवी का मंदिर माना है. कोर्ट ने अपने फैसले में पुरातात्विक साक्ष्यों, ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों को आधार बनाया है. फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन अलर्ट मोड पर है. बता दें कि भोजशाला की जांच के दौरान ASI ने एक बंद कमरे का सर्वे किया था. आइए जानते हैं आखिर उस कमरे से ASI को ऐसा क्या मिला, जिसने हिंदू पक्ष के केस को मजबूती दी?

बंद कमरे से मिलीं कई देवीदेवताओं की मूर्तियां
दरअसल, जब ASI धार की ऐतिहासिक भोजशाला का सर्वे कर रही थी, तभी एक बंद कमरे का भी सर्वे किया था. इस बंद कमरे का ताला खोले जाने पर कई प्राचीन मूर्तियां मिली थीं. इनमें भगवान गणेश, महिषासुर मर्दिनी स्वरूप में मां भगवती, हनुमान जी सहित अन्य देवीदेवताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं. इन मूर्तियों ने इस बात और पुख्ता कर दिया कि प्राचीन समय में भोजशाला एक हिंदू मंदिर था.
2100 पन्नों की रिपोर्ट ASI ने पेश की
बता दें कि ASI ने 2100 पन्नों की रिपोर्ट इंदौर हाई कोर्ट में पेश की. ASI रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे और खुदाई के दौरान परिसर से कमल और शंख जैसे धार्मिक प्रतीक, विभिन्न मूर्तियां, प्राचीन सिक्के और कई ऐतिहासिक अवशेष मिले. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि परमारकालीन भवन की मूल नींव पर बाद के समय में निर्माण किया गया. सर्वे के दौरान मिले स्तंभों, शिलालेखों और वास्तुशिल्पीय संरचनाओं से संकेत मिलता है कि यह परिसर मूल रूप से मंदिर का हिस्सा रहा हो सकता है और बाद के निर्माण में इन संरचनात्मक तत्वों का पुन: उपयोग किया गया.
इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के अहम बिंदु
हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि भोजशाला परिसर में मां सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण मौजूद हैं. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय लेते समय ASI की सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेज और अयोध्या मामले में दिए गए कानूनी सिद्धांतों को आधार बनाया गया.
कोर्ट ने कहा कि यह जिम्मेदारी सरकार की है कि वह ऐसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले स्थलों और धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे. साथ ही गर्भगृह और धार्मिक महत्व की प्रतिमाओं का संरक्षण भी अनिवार्य है.
ASI के पुराने आदेश रद्द
अदालत ने ASI के 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार नहीं दिया गया था. साथ ही उस आदेश को भी खारिज कर दिया गया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि के लिए सरकार से संपर्क करने का सुझाव दिया है. फैसले के बाद भोजशाला के प्रबंधन और उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और ASI पर छोड़ा गया है.
सुरक्षा व्यवस्था सख्त, 1200 पुलिसकर्मी तैनात
वहीं हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है. पुलिस कंट्रोल रूम में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया है. जिले को 12 लेयर सुरक्षा व्यवस्था में बांटा गया है. एसपी सचिन शर्मा ने सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा करते हुए रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को भी अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं.
ASI का 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वर्ष 2024 में भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था. इसके बाद यह मामला अदालत में पहुंचा और लगातार सुनवाई के बाद 12 मई तक बहस चली. हिंदू पक्ष ने भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और शिक्षा केंद्र बताते हुए शिलालेख, स्थापत्य अवशेष और ऐतिहासिक ग्रंथों का हवाला दिया. अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के ग्रंथ समरांगण सूत्रधार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भोजशाला की संरचना प्राचीन मंदिर निर्माण मानकों से मेल खाती है. वहीं, मुस्लिम पक्ष की ओर से इसे ऐतिहासिक मस्जिद बताते हुए अलग दृष्टिकोण रखा गया था.
2022 में शुरू हुआ था मामला
यह पूरा विवाद 2022 में दायर याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने, नियमित पूजा की अनुमति देने, ट्रस्ट गठन और अन्य मांगें शामिल थीं. याचिका में ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की भी मांग की गई थी. फैसले के बाद अब केंद्र सरकार और ASI की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है. प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है.



