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CAQM का आदेश- 2027 से दिल्ली-NCR में L5 इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर ही होंगे रजिस्टर्ड

दिल्लीएनसीआर में प्रदूषण हमेशा से एक बड़ी चिंता रहा है. अब इस जहरीले धुएं के खिलाफ वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने तीन बड़े फैसले लिए हैं. अगर आप दिल्ली या आसपास के शहरों में रहते हैं, तो ये नए नियम आपके रोजमर्रा के सफर से लेकर कमर्शियल वाहनों के बाजार तक को पूरी तरह बदलने वाले हैं. दमघोंटू हवा से बचने के लिए कड़े प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आपकी रूटीन पर पड़ेगा.

CAQM का आदेश- 2027 से दिल्ली-NCR में L5 इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर ही होंगे रजिस्टर्ड
CAQM का आदेश- 2027 से दिल्ली-NCR में L5 इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर ही होंगे रजिस्टर्ड

नो PUC, नो पेट्रोल

दिल्लीएनसीआर के पेट्रोल पंपों पर अब नियम पूरी तरह सख्त होने जा रहे हैं. आम तौर पर गाड़ी का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनवाने में लोग काफी लापरवाही बरतते हैं. इस आदत को सुधारने के लिए आयोग ने कड़ा रवैया अपनाया है. पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 1 अक्टूबर 2026 से ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ की व्यवस्था सख्ती से लागू कर दी जाएगी. अगर आपके पास अपनी गाड़ी का वैध प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र नहीं है, तो पेट्रोल पंप संचालक आपको ईंधन देने से साफ मना कर देंगे. चालान के डर से पीयूसी बनवाने का दौर अब खत्म होने वाला है, क्योंकि बिना इसके आप अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवा ही नहीं पाएंगे.

सड़कों पर दौड़ेंगे सिर्फ नए इलेक्ट्रिक थ्रीव्हीलर

प्रदूषण कम करने के साथसाथ कमर्शियल वाहन बाजार के लिए भी एक नई रूपरेखा खींच दी गई है. माल ढुलाई या सवारी ढोने वाले थ्रीव्हीलर के बाजार में अब पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों का ही दबदबा होगा. नियम के मुताबिक, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली के भीतर किसी भी नए पेट्रोल, डीजल या सीएनजी ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा. यहां सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्रीव्हीलर ही पंजीकृत किए जाएंगे.

इसके ठीक एक साल बाद, यानी 1 जनवरी 2028 से गुरुग्राम, फरीदाबाद, गौतम बुद्ध नगर , गाजियाबाद, सोनीपत जैसे अहम औद्योगिक शहरों में भी यही नियम लागू हो जाएगा. अंत में 1 जनवरी 2029 से पूरे बचे हुए एनसीआर में केवल इलेक्ट्रिक थ्रीव्हीलर ही रजिस्टर होंगे.

खेतों से धुआं रोकने उतरेगी स्पेशल फोर्स

सर्दियों के आते ही पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के खेतों से उठने वाला धुआं पूरी दिल्ली की हवा बिगाड़ देता है. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए 15 मई 2026 को सीएक्यूएम ने अपना नया ‘डायरेक्शन नंबर 99’ जारी किया है. इसके तहत तीनों राज्य सरकारों को एक बेहद कड़ा एक्शन प्लान सौंपा गया है. सबसे बड़ा और अहम कदम है ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स’ का गठन. इसके अलावा हर खेत की डिजिटल मैपिंग की जाएगी. साथ ही नोडल अधिकारियों की तैनाती होगी जो सीधे तौर पर इन मामलों के लिए जवाबदेह होंगे. लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट रखा गया है कि 2026 के धान कटाई सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह से शून्य पर लाया जा सके.

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