पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद, आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई 1520 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ सकती है. अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की कॉस्ट बढ़ने से पूरी इकोनॉमी में कीमतों पर दूसरे दौर का व्यापक दबाव पड़ सकता है. DBS बैंक की सीनियर अर्थशास्त्री और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव ने कहा कि CPI बास्केट में पेट्रोल और डीजल के वेटेज को देखते हुए, 35 फीसदी की बढ़ोतरी से कोर इंफ्लेशन रेट में 1525 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी होने की संभावना है, इसके अलावा दूसरे दौर का असर भी पड़ेगा.

बढ़ सकता है महंगाई का प्रेशर
केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के अनुसार, रिटेल फ्यूल की कीमतें सीधे तौर पर महंगाई में 15 बेसिस पॉइंट्स का योगदान दे सकती हैं, जबकि ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और कृषि इनपुट की कॉस्ट बढ़ने से 1015 बेसिस पॉइंट्स का अतिरिक्त अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है. CPI बास्केट में पेट्रोल और डीजल का कुल हिस्सा 4.8 फीसदी है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच, सरकारी तेल तेल कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की. यह चार साल में पहली बढ़ोतरी है. यह कदम सरकार द्वारा सोने और चांदी के आयात को हतोत्साहित करने, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और रुपये को सहारा देने के लिए आयात शुल्क बढ़ाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है.
इन बैंकों ने कितना लगाया महंगाई का अनुमान
| बैंक | इतना बेसिस प्वाइंटस के इजाफे का अनुमान |
| बार्कलेज | 15 |
| डीबीएस | 1525 |
| बैंक ऑफ बड़ोदा | 2030 |
| आईडीएफसी फर्स्ट बैंक | 12 |
| इकरा | 20 |
इन बैंकों ने भी लगाया महंगाई का अनुमान
इस हफ्ते की शुरुआत में दूध की कीमतें भी 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी गई थीं. ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि चूंकि यह बढ़ोतरी महीने के बीच में की गई थी, इसलिए इसका असर मई और जून की महंगाई के आंकड़ों पर पड़ेगा. Barclays की भारत की मुख्य अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी ने कहा कि सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर, जब जून की महंगाई के आंकड़ों में पूरी तरह से दिखेगा, तो इससे हेडलाइन महंगाई में क्रमशः 10 बेसिस पॉइंट और 15 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. अप्रैल में पेट्रोल की कीमतों में मामूली 0.07% की बढ़ोतरी हुई, जबकि डीज़ल की कीमतें अपरिवर्तित रहीं.
100 डॉलर के पार कच्चा तेल
इंडिया रेटिंग्स इकरा की डायरेक्टर मेघा अरोड़ा ने कहा कि CPI महंगाई पर असल असर ज्यादा होने की संभावना है, क्योंकि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से कंप्रेस्ड नेचुरल गैस, ट्रांसपोर्टेशन, माल ढुलाई, ईकॉमर्स इंडस्ट्री और डीज़ल इस्तेमाल करने वालों—जिनमें तटीय मछली पकड़ने वाले और एक्वा किसान शामिल हैं—की कीमतों पर असर पड़ेगा. 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई हैं. भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इंपोर्ट करता है, जिसमें से लगभग आधा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जो अब ज्यादातर बंद है.
कितनी हो सकती है महंगाई
ICRA का अनुमान है कि मई में महंगाई दर 4.3 फीसदी रहेगी, जो पहले अनुमानित 4.1 फीसदी से ज्यादा है. वहीं IndRa का अनुमान 3.8 फीसदी और IDFC First Bank का अनुमान 3.9 फीसदी है, यह मानते हुए कि ईंधन की कीमतों में आगे कोई बदलाव नहीं होगा. अप्रैल में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.5 फीसदी हो गई, जो मार्च में 3.4 फीसदी थी. भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई का लक्ष्य 4% बनाए रखता है, जिसमें दोनों तरफ 2 फीसदी की छूट की सीमा होती है.
अरोड़ा ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और दूध की कीमतों के मिलेजुले असर से महंगाई में लगभग 42 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होने की संभावना है. उन्होंने आगे कहा कि मई में इसका असर लगभग 20 बेसिस पॉइंट हो सकता है. Bank of Baroda के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि इसका पूरा असर तीनचार महीनों में दिखेगा, जब यह सेकेंडरी और टर्शियरी चैनलों के ज़रिए बाजार में फैल जाएगा.



