
4,000 मीटर की ऊंचाई पर खिलता है हिमालय का दुर्लभ ‘डायमंड फ्लावर’, 7 से 15 साल में एक बार देखने का मिलता है मौका
प्रकृति अपने अनोखे चमत्कारों से हमेशा लोगों को हैरान करती रही है। इन दिनों हिमालय में पाए जाने वाले एक दुर्लभ पौधे ‘डायमंड फ्लावर’ को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है। अपनी अनोखी बनावट और दुर्लभता के कारण यह पौधा प्रकृति प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
क्या है ‘डायमंड फ्लावर’?
जिसे सोशल मीडिया पर ‘डायमंड फ्लावर’ कहा जा रहा है, उसका वैज्ञानिक नाम Rheum nobile है। इसे कई स्थानों पर पदमचाल या केन्जो (Kenjo) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी चमकदार संरचना और विशिष्ट आकार के कारण इसे प्यार से ‘हिमालयी हीरा’ भी कहा जाता है।
7 से 15 साल में एक बार खिलता है
इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसका लंबा जीवन चक्र है। विशेषज्ञों के अनुसार, Rheum nobile एक मोनोकार्पिक (Monocarpic) पौधा है, यानी यह अपने जीवनकाल में केवल एक बार फूल देता है। इसे पूरी तरह विकसित होकर फूल आने में लगभग 7 से 15 वर्ष लग सकते हैं। फूल और बीज बनने के बाद इसका जीवन चक्र समाप्त हो जाता है।
ऊंचाई और बनावट बनाती है इसे खास
यह पौधा लगभग 1 से 2 मीटर (करीब 3.2 से 6.5 फीट) तक ऊंचा हो सकता है। इसकी पारदर्शी, हल्के पीले रंग की पत्तीनुमा संरचनाएं इसे अन्य पौधों से बिल्कुल अलग पहचान देती हैं। यही विशेषता इसे दूर से भी बेहद आकर्षक बनाती है।
कहां पाया जाता है?
यह दुर्लभ पौधा समुद्र तल से लगभग 4,000 मीटर (करीब 13,000 फीट) या उससे अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में उगता है। अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं और सीमित ऑक्सीजन जैसी कठिन परिस्थितियों में भी इसका विकसित होना प्रकृति की अद्भुत क्षमता का उदाहरण माना जाता है।
संरक्षण भी है जरूरी
दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों का संरक्षण पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों से अपील की जाती है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान पौधों और प्राकृतिक आवास को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर को देख सकें।



