सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि देखिए, हमें क्या पढ़ने को मिल रहा है, एक मां रो रही है, उसने अपने पांचवें बेटे को ड्रग्स के कारण खो दिया. उसने अपने सभी बच्चों को नशे की लत के कारण खो दिया. पुलिस को संवेदनशील बनाने की जरूरत है. हम जानते हैं कि किसे गिरफ्तार किया जा रहा है और किसे छोड़ा जा रहा है.

सीजेआई ने कहा कि मामलों में वृद्धि इतनी चिंताजनक है कि स्थिति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है. मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि सभी उच्च न्यायालयों को एनडीपीएस अदालतें बनाने में सहायता प्रदान की जाए. बड़े सरगनाओं या प्रभावशाली लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. समस्या यह है कि अगर आप किसी छोटे व्यक्ति को पकड़ लेते हैं तो पुलिस को अखबारों में प्रचार मिल जाता है.
ड्रग्स का केंद्र बनता जा रहा लुधियाना
उन्होंने कहा कि लुधियाना ड्रग्स का केंद्र बनता जा रहा है. शायद केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है लेकिन जब वो हस्तक्षेप करें तो यह न सोचें कि केंद्र हस्तक्षेप कर रहा है. साझा लक्ष्य ड्रग्स की समस्या पर अंकुश लगाना होना चाहिए.
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुनवाई
इस मामले से इतर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और अन्य के खिलाफ 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान गवाहों को पेश न किए जाने पर नाराजगी जाहिर की.सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जो स्टेटस रिपोर्ट सौंपी है, उसमें गवाहों को पेश न करने की कोई वजह नहीं बताई गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करीब 2 महीने से इस केस में किसी गवाह से पूछताछ नहीं हुई. हम पीठासीन न्यायाधीश को गवाहों की उपस्थिति तय करने के लिए कानूनसम्मत कदम उठाने का निर्देश देते हैं. पीठ ने गौर किया कि पहले मामले में जिन 131 गवाहों को गवाही देनी थी, उनमें से 44 की गवाही हुई है. 15 को बरी मुक्त कर दिया गया है. 72 गवाह अभी भी पेश किए जाने बाकी हैं.



