
आमतौर पर जब कोई व्यक्ति जमीन खरीदता है तो उसके मन में घर, खेत या किसी तरह का कारोबार शुरू करने का ख्याल होता है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया की एनी शोएनबर्गर ने जमीन खरीदी तो उनका मकसद इन सबसे बिल्कुल अलग था. उन्होंने ऐसी जगह पर जंगल बसाने का सपना देखा, जहां कभी गन्ने की फसल हुआ करती थी. साल 2014 में एनी ने क्वींसलैंड में गन्ने की कटाई के बाद खाली पड़े करीब 18 एकड़ जमीन के एक बड़े हिस्से को खरीदा. उस वक्त शायद ही किसी ने सोचा होगा कि आने वाले कुछ सालों में यह जमीन अपना पूरा रूप बदल लेगी. जहां दूर-दूर तक खाली जमीन नजर आती थी, वहां एक दिन घना वर्षावन(Rain Forest) खड़ा होगा और हजारों जीवों को अपना घर मिलेगा.
खाली खेत पर शुरू हुई जंगल उगाने की मुहिम
एनी ने जमीन खरीदने के बाद वहां कोई इमारत खड़ी नहीं की, बल्कि पेड़ लगाने का काम शुरू कर दिया. साल 2015 से जमीन को दोबारा हरा-भरा करने की कोशिश शुरू हुई. इसके लिए नाइटविंग्स रेनफॉरेस्ट सेंटर की मदद ली गई और धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग इस मुहिम से जुड़ते चले गए. यह काम किसी एक दिन या एक मौसम में पूरा होने वाला नहीं था. पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करना, जमीन को दोबारा जंगल के अनुकूल बनाना और लंबे समय तक इस काम को जारी रखना भी जरूरी था. एनी को इस सफर में सैकड़ों वालंटियर्स का साथ मिला.
एक साल में ही लगा दिए हजारों पौधे
इस जंगल को तैयार करने में लोगों की भागीदारी कितनी बड़ी थी, इसका अंदाजा साल 2023 के आंकड़े से लगाया जा सकता है. उस साल 140 से ज्यादा वालंटियर्स ने मिलकर करीब 3,300 पेड़ लगाए थे. ऐसे ही लगातार कई वर्षों तक पौधे लगाए जाते रहे. धीरे-धीरे खाली पड़ी जमीन पर हरियाली बढ़ती गई और छोटे-छोटे पौधे पेड़ों में बदलने लगे. एक दशक की मेहनत के बाद यहां पेड़ों की संख्या बढ़कर 1,19,000 से ज्यादा हो गई. यानी जिस जमीन को कभी गन्ने की कटाई के बाद खाली छोड़ दिया गया था, वह अब एक घने वर्षावन का रूप ले चुकी है.

अब सिर्फ पेड़ नहीं, पूरा इकोसिस्टम बदल गया
इस कहानी की सबसे खास बात सिर्फ 1,19,000 पेड़ उगाना नहीं है. असली बदलाव तो उस वक्त दिखाई दिया, जब इस इलाके में दोबारा जीव-जंतुओं की मौजूदगी बढ़ने लगी. आज यह जंगल कई तरह के जीवों का घर बन चुका है. यहां फ्लाइंग फॉक्स प्रजाति के खास चमगादड़ के साथ 75 से ज्यादा अन्य जीवों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं. इनमें कुछ दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं. एक समय जिस जमीन का इस्तेमाल गन्ने की खेती के लिए किया जाता था, वही अब वन्यजीवों के लिए आश्रय बन चुकी है. पेड़ों के बढ़ने के साथ पक्षियों, चमगादड़ों और दूसरे जीवों के लिए भी रहने और भोजन का प्राकृतिक वातावरण तैयार हुआ. एनी और वालंटियर्स की सालों की मेहनत ने इस जगह को सिर्फ हरा-भरा ही नहीं बनाया, बल्कि इसका प्राकृतिक महत्व भी बढ़ा दिया. क्वींसलैंड सरकार ने इस क्षेत्र को हाई नेचर कंजर्वेशन वैल्यू का दर्जा दिया है. एनी शोएनबर्गर की कहानी इस बात की एक दिलचस्प मिसाल है कि किसी जमीन की कीमत सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि वहां क्या बनाया जा सकता है. कभी-कभी किसी खाली जमीन पर कुछ न बनाकर पेड़ लगाना ही उसे सबसे कीमती बना देता है. आज वहां खड़े 1,19,000 से ज्यादा पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं हैं, बल्कि करीब एक दशक की मेहनत, धैर्य और प्रकृति को वापस उसका घर देने की कोशिश की कहानी भी हैं.



