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आधी रात टेंपो में महिला से​​​​​​ दरिंदगी, लोहे की रॉड से किया हमला; मेडिकल रिपोर्ट ने खोली हैवानियत की पोल, कोर्ट ने सुनाई फांसी.

आधी रात टेंपो में महिला से​​​​​​ दरिंदगी, लोहे की रॉड से किया हमला; मेडिकल रिपोर्ट ने खोली हैवानियत की पोल, कोर्ट ने सुनाई फांसी.

Mumbai Crime: मुंबई के साकीनाका इलाके में सितंबर 2021 में हुई एक भयावह वारदात ने पूरे देश को झकझोर दिया था। खैरानी रोड पर खड़े एक टेंपो में 34 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म और बर्बर हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के चलते अगले दिन उसकी मौत हो गई।

इस मामले में आरोपी मोहन चौहान को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। केस की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई और डिंडोशी सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।

सुनसान टेंपो में हुई थी खौफनाक वारदात

पुलिस और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, घटना रात के समय खैरानी रोड पर खड़े एक टेंपो में हुई थी। आरोप है कि आरोपी ने महिला के साथ दुष्कर्म करने के बाद उस पर लोहे की रॉड से हमला किया।

हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसे इलाज के लिए राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया, जहां अगले दिन उसकी मौत हो गई।

इस घटना की गंभीरता ने 2012 के दिल्ली निर्भया कांड की यादें भी ताजा कर दी थीं।

मेडिकल रिपोर्ट में सामने आई गंभीर चोटें

मामले की जांच में मेडिकल रिपोर्ट को अहम साक्ष्य माना गया। रिपोर्ट में महिला के शरीर पर गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव से जुड़ी स्थिति सामने आई थी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मेडिकल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने अपराध की प्रकृति और घटना के दौरान हुई बर्बरता को गंभीरता से लिया।

कोर्ट ने क्यों माना ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’?

डिंडोशी सत्र अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान अपराध की गंभीरता पर टिप्पणी की। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ श्रेणी का मामला माना और कहा कि अपराध की प्रकृति बेहद क्रूर और अमानवीय थी।

अदालत ने घटना के तरीके, पीड़िता की स्थिति और उपलब्ध साक्ष्यों समेत विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

आरोपी को सुनाई गई मौत की सजा

अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मोहन चौहान को दोषी ठहराया। मामले में IPC की संबंधित धाराओं के साथ एससी/एसटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी।

कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाई। हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील का प्रावधान रहता है।

साकीनाका केस ने खड़े किए थे कई सवाल

इस घटना के बाद मुंबई में महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे। वारदात की क्रूरता के कारण यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा।

साकीनाका मामले में अदालत का फैसला महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों पर न्यायपालिका के सख्त रुख के उदाहरण के तौर पर भी सामने आया।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध अदालती कार्रवाई और मामले से संबंधित रिपोर्टों पर आधारित है। यौन हिंसा से जुड़े मामलों में पीड़िता की पहचान और गरिमा की रक्षा करना आवश्यक है।

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