
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के खुर्जा नगर इलाके में हुई एक शादी का मामला चार साल बाद फिर चर्चा में आ गया था। आरोप था कि शादी समारोह के दौरान दूल्हे ने जश्न के बीच हवा में ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। पुलिस के सामने मामला आने के बाद आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई थी और उसकी गिरफ्तारी के लिए तीन विशेष टीमें गठित की गई थीं।
बताया गया था कि घटना साल 2022 की थी। अब सामने आए मामले की जांच के दौरान पुलिस ने फायरिंग और इस्तेमाल किए गए हथियार से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू कर दी थी।
छह सेकेंड में 17 राउंड फायरिंग का दावा
पुलिस के सामने आई जानकारी के मुताबिक, शादी समारोह के दौरान दूल्हे पर महज कुछ सेकेंड में कई राउंड फायरिंग करने का आरोप लगा था। दावा किया गया था कि करीब छह सेकेंड के दौरान 17 राउंड गोलियां चलाई गई थीं।
फायरिंग के दौरान समारोह में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। आसपास बच्चे और अन्य मेहमान भी दिखाई दे रहे थे। शादी की खुशी में की गई कथित फायरिंग ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
हथियार को लेकर भी जांच शुरू
मामले में जिस पिस्टल का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया था, उसे लेकर भी पुलिस ने जांच शुरू की थी। सोशल मीडिया पर इसे तुर्की निर्मित ‘जिगाना पिस्टल’ बताया गया था।
हालांकि, पुलिस की जांच में हथियार की वास्तविक पहचान, उसकी वैधता और वह आरोपी तक कैसे पहुंचा था, इसकी पुष्टि की जानी बाकी थी। पुलिस सोशल मीडिया पर किए गए दावों को सीधे तौर पर आधिकारिक तथ्य नहीं मान रही थी।
चार साल बाद पुलिस के सामने आया मामला
घटना पुरानी होने के बावजूद मामला तब गंभीर हो गया था, जब इसकी जानकारी पुलिस तक पहुंची। इसके बाद खुर्जा नगर थाने में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
पुलिस ने आरोपी दूल्हे की तलाश के लिए तीन विशेष टीमें गठित की थीं। टीमों ने संभावित ठिकानों पर दबिश देना शुरू किया था और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे।
शादी में फायरिंग पर उठे सवाल
शादी समारोह में हवाई फायरिंग का चलन कई बार लोगों की जान के लिए खतरा बन जाता है। जश्न में चलाई गई गोली किस दिशा में जाएगी, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। ऐसे मामलों में समारोह में मौजूद लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी।
बुलंदशहर के इस मामले में भी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी थी कि हथियार किसका था, आरोपी के पास वह कैसे पहुंचा और फायरिंग के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।
पुलिस की जांच और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही मामले से जुड़े बाकी तथ्यों की पूरी तस्वीर साफ होनी थी।



