Satya Report: शेयर बाजार में इन दिनों पावर सेक्टर की खूब चर्चा है और इसमें सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है अडानी पावर (Adani Power) ने. सोमवार को कंपनी के शेयरों में 3 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा गया और बीएसई (BSE) पर यह 205.35 रुपये के अपने नए 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. इस जोरदार तेजी के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं है. कंपनी जहां एक तरफ परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के क्षेत्र में अपने कदम मजबूती से बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर आने वाले दिनों में पड़ने वाली भीषण गर्मी भी इसके कारोबार को लंबी रेस का घोड़ा बना रही है.

न्यूक्लियर एनर्जी में अडानी का ‘मास्टरस्ट्रोक’
अडानी समूह अब पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा पर अपना फोकस बढ़ा रहा है. रविवार को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अडानी एटॉमिक एनर्जी (AAEL) ने अपनी एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘कोस्टल-महा एटॉमिक एनर्जी’ (CMAEL) का गठन किया है. इस नई कंपनी को 13 अप्रैल को बनाया गया और 18 अप्रैल को इसे इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट भी मिल गया. इसका मुख्य काम परमाणु ऊर्जा से बिजली पैदा करना, उसका ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन करना होगा. 5 लाख रुपये की शुरुआती अधिकृत पूंजी (Authorised Capital) के साथ बनी इस कंपनी को 10 रुपये की कीमत वाले 50,000 इक्विटी शेयरों में बांटा गया है. इससे पहले फरवरी में ही कंपनी ने अडानी एटॉमिक एनर्जी के गठन का ऐलान किया था. इस खबर ने बाजार खुलते ही निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली.
भीषण गर्मी से बिजली की बढ़ती डिमांड का सीधा कनेक्शन
शेयर बाजार में इस स्टॉक के लगातार भागने की दूसरी सबसे बड़ी वजह मौसम का मिजाज है. पिछले एक महीने में यह शेयर करीब 35 फीसदी और महज एक हफ्ते में 13 फीसदी तक चढ़ चुका है. दरअसल, ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल (JM Financial) की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि मार्च की शुरुआत में बिजली की मांग अपने चरम पर थी, लेकिन 20 मार्च के आसपास आए एक दुर्लभ पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने मौसम बदल दिया. अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान और भारत तक फैले बादलों के कारण बेमौसम बारिश और ठंडक रही. अब चूँकि यह सिस्टम उत्तर भारत से दूर जा रहा है, विशेषज्ञों का पक्का अनुमान है कि आगे भयंकर गर्मी पड़ेगी. गर्मी बढ़ने का सीधा मतलब है कि देश भर में बिजली की खपत में भारी इजाफा होगा, जिससे अडानी पावर जैसी प्रमुख कंपनियों की बिक्री और मुनाफे में सीधा उछाल आएगा.
किसके हिस्से आएगा मुनाफा?
जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट बताती है कि ‘अल नीनो’ (El Nino) वाले सालों में हमेशा बिजली की मांग में भारी उछाल देखा गया है. साल 2015 में अल नीनो के कारण अक्टूबर तक गर्मी और उमस रही, जिससे पीक पावर डिमांड 4-5 प्रतिशत तक बढ़ गई थी. वहीं, 2019 के अप्रैल-जून में जब औसत तापमान लगातार ज्यादा रहा, तो बिजली की अधिकतम मांग में 7 से 9 प्रतिशत की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई. 2023 में भी कम बारिश और अत्यधिक उमस ने यही हालात पैदा किए थे. .
ब्रोकरेज फर्म का साफ मानना है कि जब सूखे हालात के कारण हाइड्रो पावर (पानी से बनने वाली बिजली) का उत्पादन घटेगा, तो इसका नुकसान NHPC और SJVN जैसी कंपनियों को होगा. इसकी भरपाई के लिए कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स पर निर्भरता बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा एनटीपीसी (NTPC) और अडानी पावर को मिलेगा. बाजार में बिजली की मांग बढ़ने से उसकी कीमतें (Merchant Prices) भी ऊंची रहेंगी, जिससे अडानी ग्रीन और अडानी पावर के मार्जिन में तगड़ा इजाफा होना तय है.
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