
Telangana Drug News: तेलंगाना में युवाओं और छात्रों के बीच बढ़ते नशे के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ गई है। तेलंगाना एलीट एक्शन ग्रुप फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट यानी ईगल की ओर से किए गए एक अध्ययन में नशे की लत से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
अध्ययन के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में राज्य में करीब 800 छात्र नशे की गिरफ्त में आए हैं। इनमें 100 से ज्यादा छात्राएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में नशे की शुरुआत किसी अजनबी से नहीं, बल्कि दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के दौरान हुई।
दोस्तों के कहने पर पहली बार लिया ड्रग्स
ईगल टीम ने नशे की लत से जूझ रहे करीब 500 छात्रों से बातचीत की। पूछताछ के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने बताया कि उन्होंने पहली बार दोस्तों के जरिए नशीले पदार्थों का सेवन किया था।
शुरुआत में इसे केवल पार्टी या मौज-मस्ती का हिस्सा समझा गया। जन्मदिन की पार्टियां, फार्महाउस पार्टियां और पब में दोस्तों के साथ होने वाली पार्टियों में कुछ छात्रों ने पहली बार नशीले पदार्थों का सेवन किया।
लेकिन धीरे-धीरे यही प्रयोग नियमित आदत में बदल गया और कई छात्र नशे की लत का शिकार हो गए।
विश्वविद्यालय और हॉस्टल भी चिंता का विषय
अध्ययन में शिक्षण संस्थानों को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और छात्रावासों में छात्रों के बीच ड्रग्स की उपलब्धता और इस्तेमाल को लेकर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई है।
ईगल टीम ऐसे संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों वाले स्थानों पर जांच भी कर रही है।
अधिकारियों का उद्देश्य केवल नशे का इस्तेमाल करने वालों की पहचान करना नहीं, बल्कि छात्रों को समय रहते इस समस्या से बाहर निकालना भी है।
15 मिनट में हो जाता है ड्रग टेस्ट
शिक्षण संस्थानों में नशीले पदार्थों की पहचान के लिए ड्रग रैपिड टेस्ट किट का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन किट के जरिए कम समय में कई प्रकार के नशीले पदार्थों की शुरुआती स्क्रीनिंग की जा सकती है।
बताया गया है कि संदिग्ध नमूना पॉजिटिव आने पर आगे की पुष्टि के लिए सैंपल अस्पताल या संबंधित चिकित्सा केंद्र भेजे जाते हैं। इसके बाद जरूरत के मुताबिक संबंधित व्यक्ति को काउंसलिंग और नशामुक्ति सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
अचानक जांच और जागरूकता अभियान
ईगल टीम की ओर से नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। छात्रों को ड्रग्स के स्वास्थ्य, पढ़ाई और भविष्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
इसके अलावा जिन इलाकों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका अधिक है, वहां अचानक जांच भी की जा रही है। शिक्षण संस्थानों के परिसरों में भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।
छात्राओं की संख्या ने बढ़ाई चिंता
अध्ययन में करीब 800 छात्रों के नशे की चपेट में आने की बात सामने आई है। इनमें 100 से अधिक छात्राएं होने का दावा किया गया है।
छात्राओं की संख्या सामने आने के बाद अधिकारियों और शिक्षण संस्थानों के लिए यह भी जरूरी हो गया है कि नशे से बचाव के जागरूकता कार्यक्रमों में छात्राओं की विशेष जरूरतों और समस्याओं को भी शामिल किया जाए।
नशे की शुरुआत को रोकना सबसे जरूरी
ईगल टीम के अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि कई मामलों में नशे की शुरुआत अचानक नहीं होती। दोस्तों का दबाव, पार्टी कल्चर और सिर्फ एक बार प्रयोग करने की सोच युवाओं को धीरे-धीरे गंभीर समस्या की ओर धकेल सकती है।
ऐसे में विशेषज्ञों और अधिकारियों का जोर शुरुआती स्तर पर जागरूकता, समय रहते पहचान, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर पुनर्वास पर है।
ईगल टीम फिलहाल शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान और जांच की गतिविधियों को आगे बढ़ा रही है, ताकि छात्रों को नशे की लत से बचाया जा सके और जो छात्र पहले ही इसकी चपेट में आ चुके हैं, उन्हें उचित मदद मिल सके।



