Satya Report: मार्च तिमाही में विदेशी निवेशकों (FII) ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर से बड़ी निकासी की, जिसमें सबसे ज्यादा असर HDFC Bank और ICICI Bank पर दिखा. दोनों बैंकों में मिलाकर करीब 45,000 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई, जो वित्तीय शेयरों से कुल 60,000 करोड़ रुपये के आउटफ्लो का लगभग 75% है. इस दौरान शेयरों में गिरावट, वैश्विक तनाव, RBI के नए नियम और बैंक-विशेष घटनाओं ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया. हालांकि, मजबूत नतीजों के बावजूद इन बड़े बैंकों के शेयर दबाव में रहे, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई है.

मार्च तिमाही भारतीय बैंकिंग शेयरों के लिए चुनौतीपूर्ण रही, खासकर HDFC Bank और ICICI Bank के लिए. विदेशी निवेशकों (FII) ने इन दोनों बैंकों में मिलाकर करीब 45,000 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की, जो पूरे वित्तीय सेक्टर से निकले कुल निवेश का लगभग 75% हिस्सा है. डेटा के मुताबिक, HDFC Bank में करीब 35,000 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई, जिससे FII हिस्सेदारी घटकर 47.66% से 44% रह गई. वहीं ICICI Bank में लगभग 10,000 करोड़ रुपये की निकासी हुई और हिस्सेदारी 43.87% से घटकर 34.48% पर आ गई.
क्यों की इतनी बिकवाली
इस भारी बिकवाली के पीछे कई कारण रहे. HDFC Bank के मामले में चेयरमैन के अचानक इस्तीफे ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. इससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर सवाल खड़े हुए और शेयर पर दबाव बढ़ा. इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव जैसे ट्रेड वॉर और पश्चिम एशिया में संघर्ष ने निवेशकों को जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया. इसका असर भारतीय बैंकिंग शेयरों पर भी साफ दिखा.
घरेलू स्तर पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए फॉरेक्स नियम भी एक बड़ा फैक्टर बने. RBI ने बैंकों के नेट ओपन पोजीशन (NOP) को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया, जिससे बड़े बैंकों की ट्रेजरी इनकम पर असर पड़ा. पहले ये पोजीशन 250300 मिलियन डॉलर तक होती थी, जिसे घटाना पड़ा.
इसी दौरान इक्विटी और बॉन्ड मार्केट में आई गिरावट ने भी बैंकिंग शेयरों की कमजोरी को बढ़ाया. इसका नतीजा यह हुआ कि HDFC Bank का शेयर करीब 26% और ICICI Bank का शेयर करीब 10% तक गिर गया, जो BSE Sensex और Nifty 50 की गिरावट से भी ज्यादा है. हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद दोनों बैंकों के फंडामेंटल मजबूत बने हुए हैं. मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी, स्थिर एसेट क्वालिटी और मजबूत बैलेंस शीट यह दिखाती है कि बुनियादी स्तर पर बैंक अभी भी मजबूत स्थिति में हैं. मैनेजमेंट ने भी भविष्य को लेकर भरोसा जताया है, जिससे संकेत मिलता है कि मौजूदा गिरावट अस्थायी हो सकती है. .
–



