गर्मियों के मौसम में कूलर हमें राहत तो देता है, लेकिन अगर इसके रखरखाव में लापरवाही बरती जाए, तो यह बीमारियों का घर बन सकता है। इसलिए कूलर के पानी को नियमित रूप से बदलते रहना बेहद जरूरी है। अगर इसे समय पर न बदला जाए तो इसमें मच्छर और मक्खियां पनपने लगती है। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जो एक बार कूलर में पानी डालने के बाद उसे कई दिनों तक नहीं बदलते। ऐसे में ये सवाल उठता है कि कूलर का पानी कितने दिनों में बदलना चाहिए। चलिए जानते हैं।

कूलर का पानी कितने दिन में बदलें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नगर निगम के स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के अनुसार, कूलर का पानी हफ्ते में कम से कम एक बार पूरी तरह से खाली करके बदलना अनिवार्य है। हालांकि, अगर आप मच्छरों और दुर्गंध से पूरी तरह बचना चाहते हैं, तो हर 3 से 4 दिन में पानी बदलना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
पानी बदलने का सही तरीका
सिर्फ पानी निकाल देना काफी नहीं है। मच्छरों के लार्वा कूलर की दीवारों और घास से चिपके रह सकते हैं। ऐसे में सफाई करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। जब आप पानी बदलें, तो कूलर की टंकी को अच्छी तरह रगड़कर साफ करें और संभव हो तो उसे एक घंटे के लिए धूप में सूखने दें। इससे इसके बैक्टीरिया मर जाएंगे। अगर कूलर की घास पुरानी हो गई है या उसमें कीचड़ जमा है, तो उसे तुरंत बदल दें। गंदी घास में मक्खियां अंडे देती हैं।
समय पर पानी न बदलने के नुकसान
डेंगू और मलेरिया का खतरा: कूलर में जमा पानी ‘एडिस’ मच्छरों के पनपने के लिए सबसे पसंदीदा जगह है, जो डेंगू और चिकनगुनिया फैलाते हैं।
बैक्टीरिया और फंगस: लंबे समय तक पानी न बदलने से उसमें फिसलन भरी काई जम जाती है, जिससे हवा में बदबू आने लगती है और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
मक्खियों का आतंक: नमी और गंदगी वाली जगहों पर मक्खियां तेजी से फैलती हैं, जो हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियों का कारण बनती हैं।
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