Agra Job Fraud With BJP Leader: आगरा में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में खेरागढ़ विधानसभा से भाजपा विधायक भगवान सिंह कुशवाह के परिवार सहित कुल पांच लोगों से करीब 70 लाख रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुट गई है और आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

भाजपा विधायक भगवान सिंह कुशवाह के भाई भी बने शिकार
पीड़ित पक्ष के अनुसार, भाजपा विधायक भगवान सिंह कुशवाह के भाई विजय पाल कुशवाह को कुछ लोगों ने सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया था। आरोप है कि आरोपियों ने विधायक के दो भतीजों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे करीब 21 लाख रुपये वसूल लिए। इतना ही नहीं, भरोसा कायम रखने के लिए दोनों युवकों को पंचायती राज विभाग हाथरस और लोक निर्माण विभाग कन्नौज में कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र भी उपलब्ध कराए गए।
तीन महीने तक कराई गई ट्रेनिंग
आरोप है कि नियुक्ति पत्र देने के बाद युवकों को जॉइनिंग कराई गई और करीब तीन माह तक ट्रेनिंग भी कराई गई, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि उनकी नौकरी वास्तविक है। लेकिन बाद में पूरे मामले का खुलासा हुआ तो पता चला कि नियुक्ति पत्र और नौकरी की प्रक्रिया संदिग्ध है। इसके बाद पीड़ित परिवार को अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ।
शिकायत में मुख्य आरोपी के रूप में राजेश कुमार बघेल, उसके पुत्र योगेंद्र प्रताप सिंह, अनुज तथा मनोज मिश्रा समेत अन्य लोगों को नामजद किया गया है। पीड़ितों का आरोप है कि यही गिरोह सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था।
कई अन्य लोगों को भी बनाया शिकार
विजय पाल कुशवाह का कहना है कि उनके दोनों भतीजों की नौकरी लगवाने के नाम पर 21 लाख रुपये लिए गए। वहीं, चार अन्य पीड़ितों से भी सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लगभग 49 लाख रुपये की ठगी की गई। इस तरह कुल ठगी की रकम करीब 70 लाख रुपये बताई जा रही है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित पक्ष ने एक आरोपी को फिरोजाबाद के मक्खनपुर क्षेत्र में पकड़ लिया। इसके बाद उसे के हवाले कर दिया गया। आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
पुलिस कर रही मामलें की जांच
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पीड़ितों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, नियुक्ति पत्रों, लेनदेन के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस नौकरी के नाम पर जारी करने और ट्रेनिंग के जरिए लोगों का विश्वास जीतकर ठगी करने वाले संभावित रैकेट की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। मामले ने सरकारी नौकरी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और फर्जी भर्ती गिरोहों की गतिविधियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



