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​  Agra Police Transfer : 12 दारोगा, 67 हेड कांस्टेबल और 75 सिपाही हटाये गये, अब तीन साल तक GRP में ड्यूटी करेंगे

​  Agra Police Transfer :  12 दारोगा, 67 हेड कांस्टेबल और 75 सिपाही हटाये गये, अब तीन साल तक GRP में ड्यूटी करेंगे

लखनऊ, अमृत विचार । पुलिस मुख्यालय ने आगरा कमिश्नरेट में तैनात पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग अचानक बदल दी है। एक दिन पहले जारी आदेश ने  154 पुलिसकर्मियों को आगरा कमिश्नरेट से कार्यमुक्त कर जीआरपी मुख्यालय, लखनऊ भेजने का आदेश जारी ककर दिया गया है। इनमें 12 दारोगा, 67 हेड कांस्टेबल और 75 कांस्टेबल शामिल हैं। अब जरा आंकड़ा देखिए। इन 154 पुलिसकर्मियों में सबसे ज्यादा करीब 42 पुलिस कर्मी वह हैं, जिनका घर आगरा से करीब 80 किमी दूर स्थित जिला अलीगढ़ में हैं। इसके बाद बुलंदशहर के 16 और मैनपुरी के 12 पुलिसकर्मी हैं। झांसी निवासी 9 हैं। फर्रुखाबाद से 8, औरैया से 7, कानपुर नगर और कन्नौज से 66, जालौन और कानपुर देहात से 55, गौतमबुद्ध नगर और मुजफ्फरनगर से 44, बाकी पुलिसकर्मी वह हैं जिनका गृहजनपद मेरठ, बागपत, शामली , फिरोजाबाद और अमरोहा है। तबादला की इस सूची में हरियाणा निवासी पांच पुलिसकर्मी का नाम शामिल है।

बड़ा सवाल है, आखिर इन्हें लखनऊ क्यों बुलाया गया ?

डीआइजी स्थापना के आदेश के मुताबिक GRP मुख्यालय, लखनऊ में उपलब्ध रिक्तियों को भरने के लिए यह तबादला किया गया है। यानी आगरा कमिश्नरेट से इन पुलिसकर्मियों को हटाकर अब जीआरपी मुख्यालय की जरूरत पूरी की जाएगी। और एक बात खास है, यह कोई कुछ महीने की तैनाती नहीं है। आदेश में तीन साल की अवधि तय की गई है। पुलिस आयुक्त आगरा को निर्देश दिया गया है कि इन पुलिसकर्मियों को 10 दिन के भीतर जीआरपी के लिए कार्यमुक्त किया जाए। इसके बाद उन्हें जीआरपी  मुख्यालय में कार्यभार ग्रहण करना होगा।

तीन साल बाद होगी आगरा में वापसी 

यहां भी आदेश में तस्वीर साफ है। तीन साल की तैनाती पूरी होने के बाद जीआरपी में उपलब्ध रिक्तियों और वरिष्ठता क्रम को देखते हुए इन पुलिसकर्मियों को उनके गृह जनपद वापस भेजा जाएगा। यानी फिलहाल लखनऊ जाना है, तीन साल जीआरपी में ड्यूटी करनी है और इसके बाद उपलब्ध व्यवस्था के मुताबिक गृह जनपद वापसी का रास्ता खुलेगा। एक और पेंच है। अगर इनमें से किसी पुलिसकर्मी का पहले से किसी दूसरे जिले में तबादला प्रस्तावित है, तब भी उसे पहले जीआरपी के लिए कार्यमुक्त किया जाएगा। GRP का तीन साल का निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद ही उसे उस दूसरे जिले के लिए कार्यमुक्त किया जाएगा।

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