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अहमदाबाद: इस गुरुकुल में विदेश से पढ़ने आते हैं बच्चे, 4 भाषाओं के साथ सीखते हैं आधुनिक विज्ञान और भारतीय संस्कृति

अहमदाबाद: इस गुरुकुल में विदेश से पढ़ने आते हैं बच्चे, 4 भाषाओं के साथ सीखते हैं आधुनिक विज्ञान और भारतीय संस्कृति

आमतौर पर माना जाता है कि अच्छी शिक्षा के लिए बच्चों को महंगे कॉन्वेंट या बड़े निजी स्कूलों में पढ़ाना जरूरी है। लेकिन गुजरात के अहमदाबाद में स्थित एक गुरुकुल पारंपरिक शिक्षा और आधुनिक विषयों के अनूठे मेल के कारण चर्चा में है। यहां बच्चों को हिंदी, गुजराती, अंग्रेजी और संस्कृत सहित चार भाषाएं सिखाई जाती हैं। इसके साथ ही वैदिक गणित, आधुनिक विज्ञान, योग, संगीत, खेती और गौसेवा जैसी गतिविधियां भी शिक्षा का हिस्सा हैं। इस गुरुकुल में भारत के अलावा विदेशों से भी बच्चे पढ़ने आते हैं।

अहमदाबाद में कहां है यह अनोखा गुरुकुल?

इस गुरुकुल का नाम गोतीर्थ विद्यापीठम् है। यह अहमदाबाद के शांतिपुरा सर्कल के पास स्थित बंसी गिर गौशाला से जुड़ा हुआ है। यहां पारंपरिक भारतीय शिक्षा पद्धति को आधुनिक विषयों और व्यावहारिक कौशल के साथ जोड़ने पर जोर दिया जाता है।

गुरुकुल के संचालक गोपाल सुतारिया हैं। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2013 में इस विद्यापीठ की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है।

चार भाषाओं के साथ आधुनिक विज्ञान की पढ़ाई

गोतीर्थ विद्यापीठम् में बच्चों को केवल पारंपरिक विषय ही नहीं पढ़ाए जाते। यहां हिंदी, गुजराती, अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं की शिक्षा दी जाती है। इसके अलावा वैदिक गणित के साथ समकालीन गणित और आधुनिक विज्ञान पर भी ध्यान दिया जाता है।

पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास, भूगोल, खगोल, नीति शास्त्र और आध्यात्मिक अध्ययन जैसे विषय भी शामिल बताए गए हैं। इस तरह विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाने का अवसर मिलता है।

गौशाला में 1000 से अधिक गिर गायें

इस गुरुकुल की एक खास पहचान यहां की गौशाला है। रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में 1000 से अधिक गिर गायें हैं। विद्यार्थियों को गौसेवा और पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों में भी भाग लेने का अवसर मिलता है।

गुरुकुल परिसर में गोबर और पारंपरिक निर्माण सामग्री का इस्तेमाल भी देखने को मिलता है। यहां बच्चों को प्रकृति और ग्रामीण जीवन से जोड़ने के लिए खेती तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया जाता है।

पढ़ाई के साथ संगीत, योग और युद्ध कला

गोतीर्थ विद्यापीठम् में शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विद्यार्थियों को कई तरह की रचनात्मक और शारीरिक गतिविधियां सिखाई जाती हैं।

इनमें प्रमुख हैं:

  • योग और प्राणायाम
  • शास्त्रीय संगीत और नृत्य
  • चित्रकला और हस्तकला
  • गौपालन और जैविक खेती
  • चरखा चलाना और खादी निर्माण
  • पारंपरिक भारतीय युद्ध कलाएं
  • व्यवसाय प्रबंधन और व्यावहारिक कौशल

इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में अनुशासन, रचनात्मकता और व्यावहारिक समझ विकसित करना बताया गया है।

विदेशों से भी पढ़ने आते हैं विद्यार्थी

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस गुरुकुल में ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। यहां अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं।

गुरुकुल के संचालक के मुताबिक, यहां प्रवेश के लिए भारतीय संस्कृति और संस्कारों को सीखने की इच्छा को महत्व दिया जाता है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यहां प्रवेश के लिए प्रतीक्षा सूची रहती है। हालांकि, विद्यार्थियों की वर्तमान संख्या और प्रतीक्षा सूची के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

धन, व्यवसाय और जीवन के मूल्यों की भी शिक्षा

इस गुरुकुल में व्यवसाय प्रबंधन और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बताया गया है। यहां बच्चों को केवल कमाई के तरीके समझाने के बजाय धन के जिम्मेदार उपयोग, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।

गुरुकुल की वेबसाइट पर उपलब्ध पाठ्यक्रम संबंधी जानकारी के मुताबिक, गोपालन, गो-आधारित कृषि, आयुर्वेद, भाषा, चरित्र निर्माण, योग, भारतीय गणित, विज्ञान, संगीत और भारतीय युद्ध कला जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।

क्या पारंपरिक गुरुकुल आधुनिक स्कूलों का विकल्प बन सकते हैं?

गोतीर्थ विद्यापीठम् जैसे संस्थान यह दिखाते हैं कि शिक्षा में किताबी ज्ञान के साथ जीवन कौशल, कला, प्रकृति और सांस्कृतिक परंपराओं को भी स्थान दिया जा सकता है। हालांकि, किसी स्कूल या गुरुकुल की गुणवत्ता का आकलन केवल उसकी अनूठी व्यवस्था के आधार पर नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम, शिक्षकों की योग्यता, मान्यता, विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणाम और सुरक्षा व्यवस्था जैसे पहलुओं को देखकर करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट और संस्थान के पाठ्यक्रम संबंधी उपलब्ध विवरणों पर आधारित है। प्रवेश, फीस, मान्यता और वर्तमान सुविधाओं की जानकारी के लिए संस्थान से सीधे पुष्टि करना उचित होगा।

contact.satyareport@gmail.com

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