
इलाहाबाद हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हलाला के नाम पर नाबालिग से यौन शोषण और बाद में गैंगरेप के आरोपों से जुड़े मामले में FIR रद्द करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है और इसमें विस्तृत आपराधिक जांच आवश्यक है. कोर्ट ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं की आड़ में अपराध स्वीकार नहीं. जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की.
हाईकोर्ट ने CRLP(A) 8465/2026 सहित उससे जुड़ी चार आपराधिक रिट याचिकाओं को एक साथ सुना और याचिकाओं को खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रारंभिक स्तर पर FIR को रद्द नहीं किया जा सकता. साथ ही, पहले से दी गई सभी अंतरिम राहतें भी समाप्त कर दी गईं.
- हलाला के नाम पर यौन शोषण, फिर सामूहिक दुष्कर्म के आरोप.
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नाबालिग लड़की की सहमति कानूनन मान्य- कोर्ट
FIR के अनुसार पीड़िता की पहली शादी 2015 में हुई थी, उस समय वो नाबालिग थी. आरोप है कि तलाक के बाद उसे हलाला के नाम पर जबरन शारीरिक संबंध के लिए मजबूर किया गया. बाद के वर्षों में भी हलाला की आड़ में गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप सामने आए. कोर्ट ने दो टूक कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की की सहमति कानूनन मान्य नहीं होती. यदि किसी नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाए गए हैं, तो वो सीधे तौर पर अपराध है और इस पर POCSO एक्ट लागू होगा.
‘परंपरा के नाम पर अपराध सही नहीं’
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक या व्यक्तिगत कानूनों का सहारा लेकर आपराधिक कृत्यों को सही नहीं ठहराया जा सकता. यदि किसी परंपरा के नाम पर अपराध हुआ है, तो कानून अपना काम करेगा. हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में निहित समानता, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मूल्यों के खिलाफ है. ऐसे आरोप ‘अंतरात्मा को झकझोरने वाले’ हैं. कोर्ट ने माना कि पहली हलाला प्रक्रिया के दौरान पीड़िता नाबालिग थी और ये अपराध की श्रेणी में आता है. कोर्ट ने यह भी माना कि दूसरी बार हलाला के नाम पर पीड़िता के साथ गैंगरेप की साजिश रची गई थी.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा के जिले के थाना सैदनगली का है. पीड़िता का निकाह महज 15 वर्ष की उम्र में साल 2015 में जबरन कराया गया था. साल 2016 में ही पति ने तीन तलाक दे दिया और दोबारा शादी के बहाने नवंबर 2016 में पीड़िता को झांसा देकर जबरन ‘निकाह हलाला’ के लिए विवश किया था. इसके बाद साल 2017 में उसका दोबारा निकाह हुआ था.
साल 2021 में पीड़िता के पति ने दूसरी शादी कर उसे तलाक दे दिया, लेकिन जब उसे अपनी दूसरी पत्नी से कोई संतान प्राप्ती नहीं हुई तो उसने पीड़िता से तीसरी बार शादी करने का झांसा दिया और डराया. इसके बाद आरोपी ने अपने दो भाइयों के जरिए 19 फरवरी 2025 को हलाला के नाम पर पीड़िता के साथ गैंगरेप करवाया था. इस मामले मे 9 लोग आरोपी हैं.



