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अंबानी का सीक्रेट गेम प्लान: प्रोजेक्ट जुपिटर से Jio रचेगा इतिहास, निवेशकों होंगे मालामाल

पिछले साल अगस्त में, मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों से वादा किया था कि Jio Platforms Ltd. 2026 की पहली छमाही में स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग के लिए कोशिश करेगी. लेकिल जियो का आईपीओ लाना उतना भी आसान नहीं था. इस आईपीओ को लाने से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज को कई तरह के जतन करने पड़े, जो शुरुआती दौर के कुछ ही लोग जानते हैं. भले ही शेयरधारकों को इस बात की जानकारी ना हो, लेकिन देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर्दे के पीछे तीन समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रही थी.

अंबानी का सीक्रेट गेम प्लान: प्रोजेक्ट जुपिटर से Jio रचेगा इतिहास, निवेशकों होंगे मालामाल

रेगुलेटर्स को IPO के नियमों में ढील देने के लिए मनाना, बड़े इन्वेस्टर्स को शेयर बेचने के लिए तैयार करना, और देश की सबसे बड़ी लिस्टिंग की तैयारी करना, बिना उसका स्ट्रक्चर बताए. ईटी की रिपोर्ट में नाम ना बताने की शर्त पर जानकारों ने कहा कि अंदरूनी तौर पर, इस कोशिश को ‘प्रोजेक्ट जुपिटर’ कहा गया, जो इसके बड़े साइज और महत्वाकांक्षा को दिखाता था.

महीनों तक, सिर्फ रिलायंस के कुछ एग्जीक्यूटिव्स और सीनियर इन्वेस्टमेंट बैंकर्स को ही पता था कि यह डील कैसे आकार ले रही है. ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस, इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन और इंटरनल मेमोरेंडम ज़्यादातर फिजिकल रूप में बांटे गए. डिजिटल निशान न बनें, इसके लिए ईमेल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन को कम से कम रखा गया, जबकि मीटिंग्स सिर्फ हाई लेवल पर ही हुईं.

नौ महीने बाद जब अंबानी रिलायंस की सालाना शेयरधारक मीटिंग में मंच पर लौटे, तो उन्होंने घोषणा की कि Jio पब्लिक होने के लिए तैयार है. कुछ ही घंटों में, कंपनी ने अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल कर दिया. बैंकर्स हफ्तों से तैयार थे और बस एक इशारे का इंतजार कर रहे थे.

Jio IPO की टाइमलाइन

  1. अगस्त 2025 अंबानी ने 2026 की पहली छमाही में Jio को लिस्ट करने की योजना की घोषणा की.
  2. सितंबर 2025 SEBI ने बड़े IPO के लिए मिनिमम डाइल्यूशन नियम में ढील दी.
  3. अक्टूबर 2025 रिलायंस ने कोटक और मॉर्गन स्टेनली को बैंकर के तौर पर नियुक्त किया.
  4. दिसंबर 2025 चार और इन्वेस्टमेंट बैंक IPO सिंडिकेट में शामिल हुए.
  5. फरवरी 2026 IPO के बदले हुए नियमों की नोटिफिकेशन का इंतज़ार करते हुए फाइलिंग में देरी हुई.
  6. 13 मार्च 2026 सरकार ने नए मिनिमम डाइल्यूशन नियमों की नोटिफिकेशन जारी की.
  7. 17 मार्च 2026 रिलायंस ने सिंडिकेट का विस्तार करके 19 इन्वेस्टमेंट बैंक शामिल किए.
  8. 27 मार्च 2026 कमज़ोर मार्केट कंडीशंस के कारण फाइलिंग फिर से टाल दी गई.
  9. मई 2026 IPO का स्ट्रक्चर OFS से बदलकर प्राइमरी इश्यूएंस कर दिया गया.
  10. 19 जून 2026 रिलायंस ने Jio के IPO के लिए ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल किया.

कब शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट जुपिटर’

रिलायंस ने अक्टूबर तक ‘प्रोजेक्ट जुपिटर’ शुरू कर दिया था. जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, इस गोपनीय पहल का नेतृत्व सीनियर एग्जीक्यूटिव्स ने किया, जिनमें चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर वी. श्रीकांत, केआर राजा और Jio के एग्जीक्यूटिव अंशुमान ठाकुर शामिल थे. दिसंबर में सिंडिकेट के विस्तार से पहले, कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी और मॉर्गन स्टेनली वे पहले इन्वेस्टमेंट बैंक थे जिन्हें इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था. हालांकि बैंकों ने काम शुरू कर दिया था, लेकिन उन्हें आधिकारिक तौर पर दिसंबर तक नियुक्त नहीं किया गया था. इस प्रोसेस से जुड़े लोगों के अनुसार, इस अनोखी व्यवस्था के कारण सलाहकार उस समय भी ट्रांजैक्शन पर काम कर पाए जब इसे अभी तैयार ही किया जा रहा था.

कम नहीं थी चुनौतियां

कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मौजूदा शेयरधारकों से सहमति हासिल करना था. उन लोगों ने बताया कि KKR & Co., Meta Platforms Inc., Alphabet Inc. और अन्य निवेशक आखिरकार प्रोराटा आधार पर अपनी हिस्सेदारी का लगभग 8 फीसदी कम करने पर सहमत हो गए, जिससे कंपनी अपनी सापेक्ष ओनरशिप बनाए रखते हुए पब्लिक फ्लोट की जरूरतों को पूरा कर सकी. रेगुलेटरी माहौल भी बदल रहा था. सितंबर में, भारत के सिक्योरिटीज रेगुलेटर ने 5 ट्रिलियन रुपए से ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम हिस्सेदारी कम करने की जरूरतों में ढील दी और इस लिमिट को 5 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया. सरकार ने मार्च में इन बदलावों की आधिकारिक सूचना जारी की, जिससे ट्रांज़ैक्शन के लिए एक बड़ी बाधा दूर हो गई.

बदला गया आईपीओ का स्ट्रक्चर

IPO का स्ट्रक्चर भी बदल गया. रिलायंस ने शुरू में ‘ऑफरफॉरसेल’ की योजना बनाई थी, जिसमें मौजूदा निवेशक जियो की लगभग 2.8 फीसदी हिस्सेदारी बेचते, जबकि कंपनी खुद कोई शेयर नहीं बेचती. लेकिन उन लोगों ने बताया कि कमजोर शेयर बाजार और डॉलर रिटर्न पर गिरते रुपए के असर को देखते हुए कुछ शेयरधारकों ने प्रस्तावित वैल्यूएशन पर आपत्ति जताई. साथ ही, भारत सरकार विदेशी पूंजी को देश में बनाए रखने के लिए कदम उठा रही थी.

आखिरकार रिलायंस ने IPO को पूरी तरह से ‘प्राइमरी इश्यू’ में बदल दिया, ताकि इससे जुटने वाली लगभग 4 बिलियन डॉलर की राशि कंपनी के पास रहे और भारत में ही रहे. 19 जून को प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया गया, जिसमें 19 सलाहकार शामिल थे. अंबानी का जन्म 19 अप्रैल को हुआ था, यह एक ऐसी संख्यात्मक समानता थी जिस पर इस प्रोसेस में शामिल लोगों का ध्यान जरूर गया.

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