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आधी रात गड्ढे में फंसी प्रसूता को ले जा​​​​​​ रही एंबुलेंस, ग्रामीणों ने लगाया 2 घंटे देरी का आरोप; जन्म के बाद नवजात की मौत.

आधी रात गड्ढे में फंसी प्रसूता को ले जा​​​​​​ रही एंबुलेंस, ग्रामीणों ने लगाया 2 घंटे देरी का आरोप; जन्म के बाद नवजात की मौत.

आगरा के बाह इलाके से एक बेहद दुखद मामला सामने आया था, जहां प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को अस्पताल ले जा रही सरकारी एंबुलेंस रास्ते में गड्ढों और कीचड़ में फंस गई थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि एंबुलेंस काफी देर तक रास्ते में फंसी रही और इलाज में देरी के बाद प्रसव के दौरान नवजात बच्ची की मौत हो गई।

हालांकि, प्रशासन ने एंबुलेंस के दो घंटे तक फंसे रहने के आरोपों को खारिज किया था। अधिकारियों के मुताबिक, एंबुलेंस करीब 10 से 15 मिनट ही रास्ते में रुकी थी और प्रसूता को रात करीब 3 बजे जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा दिया गया था। मामले की जांच के आदेश दिए गए थे।

आधी रात प्रसव पीड़ा शुरू होने पर बुलाई गई एंबुलेंस

घटना बाह तहसील के गढ़वार गांव की बताई गई थी। 2 सितंबर की रात करीब 1 बजे महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। इसके बाद परिजनों ने सरकारी 108 एंबुलेंस को फोन किया था।

एंबुलेंस गांव के पास पहुंची, लेकिन मुकुंदपुरा के पास खराब सड़क ने परेशानी खड़ी कर दी थी। बारिश के कारण सड़क पर जलभराव और कीचड़ था। जगह-जगह गहरे गड्ढे होने की वजह से एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी और रास्ते में फंस गई थी।

ग्रामीणों ने ट्रैक्टर से एंबुलेंस को बाहर निकाला

ग्रामीणों का आरोप था कि एंबुलेंस करीब दो घंटे तक कीचड़ में फंसी रही थी। आधी रात को जब प्रसूता दर्द से परेशान थी, तब ग्रामीणों ने ट्रैक्टर की मदद से एंबुलेंस को बाहर निकालने की कोशिश की थी।

किसी तरह एंबुलेंस को रास्ते से निकालने के बाद प्रसूता को दूसरे रास्ते से अस्पताल ले जाया गया था। परिजनों का आरोप था कि इस पूरी घटना के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी हुई थी।

इसके बाद महिला को जैतपुर सीएचसी ले जाया गया था। प्रशासन के अनुसार, वहां भर्ती कराए जाने के समय जच्चा और बच्चा दोनों की हालत सामान्य बताई गई थी।

प्रशासन ने दो घंटे देरी के आरोप को बताया गलत

मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों के आरोपों से अलग जानकारी दी थी। बाह के एसडीएम के मुताबिक, बारिश के कारण सड़क खराब थी, लेकिन एंबुलेंस चालक की सूझबूझ से वाहन ज्यादा देर तक नहीं फंसा था।

प्रशासन का दावा था कि एंबुलेंस केवल 10 से 15 मिनट तक रुकी थी और रात करीब 3 बजे प्रसूता को जैतपुर सीएचसी पहुंचा दिया गया था। अस्पताल में महिला को निगरानी में रखा गया था, क्योंकि उस समय डाइलेशन नहीं हुआ था।

अधिकारियों के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजे परिजन महिला को अपनी इच्छा से एक निजी अस्पताल लेकर चले गए थे। वहां प्रसव के दौरान नवजात बच्ची की मौत हो गई थी।

एक महीने से खराब थी सड़क

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया था कि मुकुंदपुरा के पास करीब 200 मीटर लंबा सड़क का हिस्सा लगभग एक महीने से खराब पड़ा था। उनका कहना था कि इस संबंध में PWD के अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई।

ग्रामीणों ने तहसील में आयोजित समाधान दिवस में पहुंचकर सड़क को पक्का कराने और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।

जांच के बाद साफ होगी असली वजह

नवजात की मौत के बाद एंबुलेंस के रास्ते में फंसने और इलाज में देरी को लेकर सवाल खड़े हुए थे। एक तरफ ग्रामीणों ने लंबी देरी का आरोप लगाया था, जबकि प्रशासन ने इन आरोपों को गलत बताया था।

मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच टीम गठित की गई थी। जांच में यह स्पष्ट होना था कि एंबुलेंस वास्तव में कितनी देर रास्ते में फंसी थी और नवजात की मौत के पीछे इलाज में देरी की कोई भूमिका थी या नहीं।

घटना के बाद PWD की ओर से सड़क की मरम्मत कराए जाने की बात भी प्रशासन ने कही थी।

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