Sanctioning Russia Act of 2026: अमेरिकी सीनेट ने रूस पर नए और सख्त प्रतिबंध लगाने वाला एक विधेयक पास कर दिया है. इसके तहत भारत समेत पांच देशों पर 100% टैरिफ लग सकता है. यह विधेयक दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किया गया था. इसे मंगलवार को पास किया गया, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की अमेरिका के कैपिटल हिल में थे.

इस विधेयक का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना, ताकि वह यूक्रेन पर अपना हमला रोक दे. विधेयक पास करने के लिए हुए वोटिंग में 86 सीनेटरों ने पक्ष में और 12 ने विपक्ष में वोट किया. इस कानून में रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने और ऊपर बताए पांच देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिससे ये देश रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता कम करें.
अप्रैल 2025 में पेश किए जाने वाले इस विधेयक के बारे में सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस साल की शुरुआत में ही बताया था कि अमेरिका और भारत के बीच चल रहे व्यापार तनाव के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मंजूरी दे दी है. यह विधेयक ऐसे समय में लाया गया है जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई है.
रूस की आर्थिक नाकेबंदी
इससे भारत की रूसी तेल और गैस पर निर्भरता बढ़ गई है. ईरानअमेरिका युद्ध के चलते खाड़ी देशों से आने वाला कच्चा तेल पूरी तरह बंद हो गया है. यह तेल पहले भारत के कुल तेल आयात का करीब 40% हिस्सा था. अब भारतीय तेल शोधन कंपनियों को रूसी कच्चे तेल को मुख्य विकल्प बना लेना पड़ा है. सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पहले कहा था कि अगर कोई देश रूस से बहुत कम गैस खरीदता है यानी रूस के कुल गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम तो उसे इस विधेयक के तहत छूट दी जा सकती है.
अभी इन देशों पर कितना टैरिफ
अगर मौजूदा वक्त की बात करें तो भारत पर अभी 10 फीसदी का अमेरिकी टैरिफ लागू है. वहीं, चीन को 12.5 फीसदी टैरिफ वाले स्लैब में रखा गया है. इसके अलावा चीन के कुछ सामानों पर 7.5% से 25% तक के अलग शुल्क भी प्रभावी हैं. वहीं, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों पर भी 10 से 12.5% के बीच अमेरिकी टैरिफ लागू हैं. अमेरिकी सीनेट में पास हुए बिल के बाद अब इन पांचों देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लग सकता है. ये पांचों देश रूस से कच्चे तेल और गैस का बड़े पैमाने पर आयात कर रहे हैं.



