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मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI ने खोला खजाना, सरकार को मिलेगा अब तक का सबसे बड़ा मुनाफा!

वैश्विक मोर्चे पर जहां मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं दबाव महसूस कर रही हैं, वहीं भारत के लिए राहत भरी खबर है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक इस साल केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश सौंपने की तैयारी में है. यह रकम सरकारी खजाने के लिए एक मजबूत ढाल का काम करेगी. बेहतर सरकारी नीतियों और मजबूत आर्थिक प्रबंधन के दम पर देश का खजाना लगातार भर रहा है. जब सरकार के पास पर्याप्त सरप्लस फंड होता है, तो वह बिना किसी अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाले देश में इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याण के काम तेजी से कर पाती है. इस महीने होने वाली आरबीआई बोर्ड की अहम बैठक में इस बंपर लाभांश की मात्रा पर अंतिम मुहर लगने की पूरी उम्मीद है.

मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI ने खोला खजाना, सरकार को मिलेगा अब तक का सबसे बड़ा मुनाफा!
मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI ने खोला खजाना, सरकार को मिलेगा अब तक का सबसे बड़ा मुनाफा!

पिछली बार के सारे रिकॉर्ड टूटना तय

रिजर्व बैंक का सरप्लस फंड कैसे तय होता है, इसके पीछे ‘इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क’ काम करता है. इस फ्रेमवर्क के नियमों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक को अपनी बैलेंस शीट का 4.50 से 7.50 प्रतिशत हिस्सा ‘कंटिंजेंट रिस्क बफर’ के रूप में सुरक्षित रखना होता है. इसके बाद जो रकम बचती है, वह सरकार के खजाने में जाती है. पिछले वित्त वर्ष में आरबीआई ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का भारीभरकम लाभांश दिया था. यह आंकड़ा उससे पिछले साल ट्रांसफर किए गए 2.11 लाख करोड़ रुपये से 27 फीसदी ज्यादा था. इस बार यह पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छूटने वाला है.

सरकारी बैंकों का शानदार मुनाफा बना ताकत

सरकार की वित्तीय स्थिति को सिर्फ आरबीआई ही मजबूती नहीं दे रहा है, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का शानदार प्रदर्शन भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है. सरकार के बैंकिंग सुधारों का सीधा असर अब जमीन पर दिख रहा है. एसेट क्वालिटी में सुधार और कर्ज बांटने की तेज रफ्तार के चलते वित्त वर्ष 202526 में इन बैंकों का कुल शुद्ध मुनाफा 11.1 फीसदी उछलकर 1.98 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. वहीं, ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी 3.21 लाख करोड़ रुपये रहा. यह लगातार चौथा साल है जब सरकारी बैंकों ने मुनाफे का झंडा गाड़ा है. बजट दस्तावेजों के मुताबिक, सरकार ने 202627 में आरबीआई और राष्ट्रीयकृत बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये के लाभांश का अनुमान लगाया था. लेकिन बैंकों की इस शानदार कमाई को देखते हुए असल रकम बजट अनुमानों से काफी ज्यादा रहने वाली है.

अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

आरबीआई और बैंकों से मिलने वाला यह पैसा ‘गैरकर राजस्व’ का हिस्सा होता है. वित्त वर्ष 202627 के लिए केंद्र सरकार ने गैरकर राजस्व से 6.66 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा, सरकारी कंपनियों और अन्य निवेशों से भी 75,000 करोड़ रुपये का लाभांश मिलने की उम्मीद है, जो पिछले साल 71,000 करोड़ था. वहीं टैक्स से होने वाली कमाई में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है. टैक्स रेवेन्यू 26.74 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 28.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. यह पूरा पैसा देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने का काम करेगा. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण पैदा होने वाली किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए यह फंड सरकार को पूरी वित्तीय आजादी देगा, जिससे भारत की विकास यात्रा बिना रुके आगे बढ़ती रहेगी.

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