टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और उनके बेटे नेविल टाटा ने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह से जुड़े विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट और मुंबई की शहर दीवानी अदालत में कैविएट दाखिल की हैं. इसके जरिए उन्होंने मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष सुने जाने का अनुरोध किया है. आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, नोएल और नेविल टाटा ने सात अक्टूबर को ये कैविएट दाखिल कीं. श्रीनिवासन और सिंह ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के समक्ष नोएल और नेविल टाटा के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं. इन शिकायतों में टाटा ट्रस्ट से जुड़े कुछ संस्थानों में प्रबंधन संबंधी खामियों और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे. ऐसी खबरें हैं कि नोएल और नेविल टाटा पहले ही चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय में कैविएट दाखिल कर चुके हैं.

कैविएट में किसे बनाया संबंधित पक्ष
बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल की गई कैविएट में नोएल टाटा ने श्रीनिवासन को संबंधित पक्ष बनाया है. सिंह के अलावा वकील डेरियस खंबाटा और टाटा समूह के वरिष्ठ अधिकारी भास्कर भट्ट को भी अतिरिक्त पक्षकार बनाया गया है. मुंबई की शहर दीवानी अदालत में दाखिल कैविएट में भी नोएल और नेविल टाटा ने श्रीनिवासन को संबंधित पक्ष बनाया है. यहां भी सिंह, खंबाटा और भट्ट को अतिरिक्त पक्षकार के रूप में शामिल किया गया है. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की 66 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट से जुड़े न्यास के पास है. नोएल टाटा के नेतृत्व वाले टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के प्रबंधन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं.
लिस्टिंग को लेकर है विवाद
नोएल पक्ष टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने को लेकर चिंतित है, जबकि कंपनी का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों का पालन करने के पक्ष में है. इन निर्देशों के तहत कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना जरूरी है. टाटा संस के निदेशक मंडल की 17 सितंबर को हुई बैठक में मतदान से पहले दोनों पक्षों के मतभेद खुलकर सामने आए थे. टाटा ट्रस्ट के नामित निदेशक होने के बावजूद श्रीनिवासन ने टाटा संस के निदेशक मंडल के बहुमत का साथ दिया था. इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच विभिन्न मंचों पर अलगअलग मुद्दों को लेकर विवाद जारी हैं.



