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क्या रोजाना आयरन की गोली खाने से पेट हो रहा है खराब? भरपाई के लिए खाएं इन 5 अनाजों की रोटी! डॉक्टर से जानिए फायदे

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शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया होने पर थकान, कमजोरी, चक्कर और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एनीमिया के कारणों में आयरन की कमी एक प्रमुख कारण है। ऐसे में डॉक्टर जरूरत के मुताबिक आयरन रिच फूड्स के साथ आयरन सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों को आयरन सप्लीमेंट लेने पर कब्ज, पेट दर्द, मतली या पेट से जुड़ी दूसरी परेशानियां हो सकती हैं। इन समस्याओं के कारण कुछ लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना बंद कर देते हैं। ऐसे में डाइट में आयरन से भरपूर फूड्स का सेवन मददगार हो सकता है।

फिजिशियन एवं एमडी (मेडिसिन) डॉ. शालिनी सिंह सालुंके के मुताबिक, आयरन की जरूरत को पूरा करने के लिए डाइट में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे राजगिरा, बाजरा, रागी, ज्वार, क्विनोआ, काला तिल और सहजन के पत्ते शामिल किए जा सकते हैं। इनके अलावा अंडा और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी संतुलित डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि आयरन की गोली लेने पर पेट क्यों खराब होता है और इसकी कमी होने पर डाइट में किन अनाज को शामिल किया जा सकता है  जिससे पाचन भी दुरुस्त रहे और दवाओं के साइड इफेक्ट से भी बचा जा सके।

आयरन की गोली कैसे पेट को खराब करती है?

आयरन की गोली से पेट खराब होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि आयरन का कुछ हिस्सा शरीर में अवशोषित नहीं हो पाता और आंतों में रह जाता है।यह पाचन तंत्र को इरिटेट कर सकता है, जिससे कुछ लोगों को कब्ज, पेट दर्द, मितली, गैस या दस्त जैसी परेशानी हो सकती है।

आयरन के लिए रागी की रोटी खाएं

रागी पोषक तत्वों से भरपूर अनाज है, जिसमें आयरन के साथ कैल्शियम, फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इस अनाज का सेवन रोटी, डोसा, चीला या दलिया के रूप में करें बॉडी को भरपूर आयरन मिलेगा। रागी में मौजूद आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने की प्रक्रिया में योगदान देता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN, ICMR) और Journal of Food Science and Technology के अनुसार, रागी में हाई फाइबर और पॉलीफेनोल्स होते हैं जो नॉन-हीम आयरन के अवशोषण को धीमा कर सकते हैं। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि रागी के साथ विटामिन-C जैसे नींबू या आंवला करने से इसकी अवशोषण क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

बाजरा की रोटी खाएं

बाजरा एक ऐसा साबुत अनाज है जिसमें आयरन, फाइबर, प्रोटीन और कई अन्य पोषक तत्वों भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।  बाजरा का सेवन उसकी रोटी, खिचड़ी, चीला या दलिया बनाकर करें तो बॉडी को फायदा होगा। बाजरे में मौजूद आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण में मदद करता है और नियमित संतुलित डाइट का हिस्सा बनने पर आयरन की जरूरत पूरी करने में योगदान दे सकता है। The Journal of Nutrition और ICRISAT की रिसर्च के अनुसार, भारत में कुपोषण और एनीमिया से निपटने के लिए बायो फोर्टिफाइड बाजरे को एक बेहतरीन विकल्प माना गया है। क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया कि बाजरा नियमित खाने से बच्चों और महिलाओं में फेरिटिन यानी आयरन स्टोर के स्तर में सुधार होता है।

ज्वार को मिक्स करके बनाएं रोटी

ज्वार एक ग्लूटेन-फ्री साबुत अनाज है, जिसमें आयरन, फाइबर, प्रोटीन और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे रोटी, भाकरी, दलिया या दूसरे व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है। ज्वार में मौजूद आयरन शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आयरन की जरूरत को पूरा करने में योगदान देता है। ICMR-NIN की ‘इंडियन फूड कम्पोजिशन टेबल्स’ (IFCT) के अनुसार, ज्वार एक ग्लूटेन-फ्री अनाज है। Food Chemistry पत्रिका में प्रकाशित अध्ययनों से पता चलता है कि ज्वार में टैनिन और फाइटेट्स मौजूद होते हैं, जिससे नॉन-हीम आयरन का अवशोषण प्रभावित होता है। हालांकि, ज्वार को अंकुरित करने या इसे खमीर बनाने से इसके एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं और आयरन का अवशोषण बेहतर होता है।

राजगीर (अमरंथ) को मिक्स करें गेहूं के आटे के साथ

राजगीर यानी अमरंथ को आयरन सहित कई पोषक तत्वों से भरपूर अनाज माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और खनिज भी पाए जाते हैं। इसे आटे के रूप में रोटी, चीला या लड्डू बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।  राजगीर से मिलने वाला आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में योगदान देता है और संतुलित आहार के जरिए रोजाना आयरन की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है।  International Journal of Food Sciences and Nutrition के अनुसार, राजगीर में न केवल आयरन बल्कि लाइसिन (Lysine) नामक अमीनो एसिड और कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में होता है। रिसर्च बताती है कि इसमें मौजूद आयरन का बायो-अवेलेबिलिटी अन्य अनाजों की तुलना में बेहतर होती है, जो हीमोग्लोबिन का स्तर बनाए रखने में मददगार है।

ओट्स

ओट्स में आयरन के साथ फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे दलिया, ओवरनाइट ओट्स या चीला बनाकर आसानी से डाइट में शामिल किया जा सकता है। ओट्स से मिलने वाला आयरन पौधों से प्राप्त नॉन-हीम आयरन होता है। British Journal of Nutrition और USDA (अमेरिकन कृषि विभाग) के डेटा के मुताबिक, ओट्स में आयरन के साथ ‘सॉल्युबल फाइबर पाया जाता है। ओट्स में मौजूद फाइटिक एसिड नॉन-हीम आयरन के अवशोषण को बाधित करता है, इसलिए शोधकर्ता ओट्स को रात भर भिगोकर या विटामिन-C से भरपूर फलों जैसे संतरा, कीवी, स्ट्रॉबेरी के साथ खाने की सलाह देते हैं। विटामिन सी से भरपूर फूड्स के साथ इसका सेवन करने से बॉडी में इसका अवशोषण बेहतर होता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। आयरन युक्त अनाज और खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन गंभीर आयरन की कमी या एनीमिया में केवल खान-पान के जरिए इलाज संभव नहीं है। आयरन सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

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