
ऑस्ट्रेलिया की टीम को बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली शर्मनाक हार के बाद चयनकर्ताओं ने बड़ा फैसला लिया है। डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट के बाद जैक वेदराल्ड को टीम से बाहर कर दिया गया है। अब उनकी जगह मैट रेनशॉ को अगले टेस्ट के लिए शुरुआती बल्लेबाज के तौर पर मौका मिलने की उम्मीद है।
जैक वेदराल्ड के लिए डार्विन टेस्ट की शुरुआत बेहद खराब रही थी। पहली गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप से काफी बाहर जाती गेंद पर गलत शॉट खेलने की कोशिश की। इसके बाद अगली गेंद भी ज्यादा प्रभावी नहीं रही। तीसरी गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप के करीब आई गेंद को काटने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले से लगकर विकेटों पर जा लगी। इस तरह छह मिनट से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई।
वेदराल्ड के लिए यह मुकाबला खास था क्योंकि डार्विन को उनकी घरेलू वापसी के लिए सही मंच माना जा रहा था। लेकिन वह मौके का फायदा नहीं उठा सके। छह टेस्ट में उनके नाम केवल एक अर्धशतक है और उनका बल्लेबाजी औसत 20.36 रहा है। ऐसे प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की हार ने उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।
बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में अपने तेज गेंदबाजों के दम पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन बांग्लादेश के शीर्ष क्रम ने उन्हें काफी आसानी से खेला। इसी वजह से चयनकर्ताओं के सामने ऊपरी क्रम में बदलाव का दबाव बढ़ गया। माना जा रहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया डार्विन में हार से बच जाता तो वेदराल्ड को एक और मौका मिल सकता था।
अब मैट रेनशॉ के लिए वापसी का रास्ता खुल गया है। रेनशॉ ने पिछले घरेलू सत्र में क्वींसलैंड के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने शेफील्ड शील्ड में 46.09 की औसत से रन बनाए और दो शतक भी लगाए। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया की एशेज टीम में वेदराल्ड से पीछे रह गए थे।
गौरतलब है कि रेनशॉ ने अब तक 14 टेस्ट खेले हैं और उनकी पिछली तीन टेस्ट पारियां मध्यक्रम में आई थीं। उनका आखिरी टेस्ट मैच 2023 की शुरुआत में दिल्ली में हुआ था। अब मैके में उन्हें फिर से पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में भी सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी।
वॉर्नर के संन्यास के बाद से ऑस्ट्रेलिया अब तक नौ अलगअलग सलामी बल्लेबाज आजमा चुका है। ऐसे में रेनशॉ के लिए यह मौका बेहद अहम है। उनके मार्गदर्शक उस्मान ख्वाजा भी लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में लौटकर सफल रहे थे और रेनशॉ उनसे प्रेरणा ले सकते हैं।
दूसरी ओर, मार्नस लाबुशेन पर भी दबाव बढ़ गया है। कोच और चयनकर्ता एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उन्हें साफ संकेत दिया है कि टीम में जगह बनाए रखने के लिए उन्हें बड़ी पारियां खेलनी होंगी। डार्विन की दूसरी पारी में लाबुशेन ने 31 रन बनाए और तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका खेल बेहतर नजर आया, लेकिन मैकडोनाल्ड के मुताबिक यह पारी सिर्फ 31 रन तक ही सीमित रही।
लाबुशेन का टेस्ट औसत अब 44.16 तक गिर चुका है, जबकि एक समय उनका औसत 60 के आसपास था। तीन साल से टेस्ट शतक नहीं लगा पाने के कारण मैके में उनके प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। अगले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य श्रृंखला बराबर करना होगा, क्योंकि घरेलू मैदान पर बांग्लादेश से श्रृंखला हारना टीम के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।




