बांग्लादेश। बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को प्रमुख मुद्दा बना दिया है। ढाका का कहना है कि यात्रा के लिए दोनों देशों के बीच “अनुकूल माहौल” जरूरी है और उसने भारत से हसीना समेत अन्य वांछित लोगों के प्रत्यर्पण पर कार्रवाई तेज करने की मांग की है।

भारत यात्रा पर क्यों बना संशय?
तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत चल रही है। पहले 2025 अगस्त के बीच यात्रा की संभावना जताई गई थी, लेकिन अब ढाका की शर्तों के कारण कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
बांग्लादेश की तरफ से साफ संकेत दिया गया है कि भारत को हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर कदम उठाना चाहिए। भारत ने प्रत्यर्पण अनुरोध मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि मामले की समीक्षा घरेलू कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।
हसीना का मुद्दा इतना अहम क्यों?
2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। इसके बाद से उनकी भारत में मौजूदगी दोनों देशों के रिश्तों में सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल हो गई है। बांग्लादेश उन्हें वापस लाने की मांग लगातार उठा रहा है, जबकि भारत के लिए प्रत्यर्पण का फैसला कानूनी और कूटनीतिक दोनों पहलुओं से जुड़ा हुआ है।
रिश्तों के सामने कौनसी चुनौतियां?
भारतबांग्लादेश संबंधों में व्यापार, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा, जल बंटवारा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। हसीना का प्रत्यर्पण विवाद इन व्यापक मुद्दों पर बातचीत को प्रभावित कर सकता है। साथ ही बांग्लादेश के चीन के साथ बढ़ते रणनीतिक सहयोग के बीच भारत के लिए ढाका के साथ संवाद बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते खुले हैं। भारत के उच्चायुक्त ने भी कहा है कि मौजूदा मतभेदों को सुलझाने के लिए संवाद ही सबसे अहम माध्यम है।



