TrendingUttar Pradesh

Bank Strike 2026: 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल की चेतावनी, 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन स्ट्राइक का भी ऐलान

नई दिल्ली: देशभर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल करने का फैसला किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगे भी बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

यूएफबीयू नौ बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी श्रम संघों का शीर्ष संगठन है। संगठन के मुताबिक, पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने में देरी, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना को लेकर मतभेद और पेंशन से जुड़े मुद्दे प्रमुख मांगों में शामिल हैं।

11 सितंबर की हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं पर पड़ेगा असर

प्रस्तावित हड़ताल 11 सितंबर, शुक्रवार को होगी। इसके बाद दो दिन बैंक अवकाश हैं। ऐसे में यदि हड़ताल होती है तो कई हिस्सों में बैंकिंग सेवाएं लगातार कई दिनों तक प्रभावित हो सकती हैं। कुछ राज्यों में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का अवकाश भी रहेगा।

हालांकि, बैंक शाखाओं और सेवाओं पर वास्तविक असर संबंधित बैंक, राज्य और अवकाश व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

28 सितंबर से तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी

यूएफबीयू ने 11 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के अलावा 28 सितंबर से तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल की भी चेतावनी दी है। यह आंदोलन छमाही लेखा बंदी के समय प्रस्तावित है।

संगठन ने कहा है कि अगर सरकार और बैंक प्रबंधन ने उनकी मांगों का समाधान नहीं किया तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शुरू की जा सकती है।

पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था पर क्या है विवाद?

यूएफबीयू ने पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। संगठन के अनुसार, भारतीय बैंक संघ ने 8 मार्च 2024 को हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते/नौवें संयुक्त पत्र के तहत इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी।

प्रस्ताव के मुताबिक सोमवार से शुक्रवार तक काम के समय में 40 मिनट की बढ़ोतरी की जानी थी। यूनियनों का कहना है कि प्रस्ताव को सरकार के पास भेजे जाने के बावजूद यह दो साल से अधिक समय से लंबित है।

PLI योजना पर भी यूनियनों को आपत्ति

बैंक अधिकारियों के लिए लागू की जा रही प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी PLI योजना को लेकर भी यूएफबीयू ने विरोध जताया है।

यूनियनों का कहना है कि सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था आईबीए के साथ बनी सहमति से अलग है। उनके अनुसार, पहले प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन को संबंधित बैंक के समग्र प्रदर्शन से जोड़ने और स्केलVII तक के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए समान व्यवस्था की बात हुई थी।

यूएफबीयू के मुताबिक सरकार की मौजूदा योजना में स्केलIV और उससे ऊपर के अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिन के मूल वेतन के बराबर पीएलआई मिल सकता है। वहीं कामगार कर्मचारियों और स्केलIII तक के अधिकारियों के लिए अधिकतम 15 दिन के मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता देने की व्यवस्था बताई गई है।

पेंशन और OPS की मांग भी शामिल

बैंक यूनियनों की अन्य प्रमुख मांगों में पेंशन का अपडेट और उसमें सुधार, सभी पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते की समान गणना व्यवस्था और NPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प देना शामिल है।

यूएफबीयू का कहना है कि ये मुद्दे अभी तक लंबित हैं।

PLI मामले में सुलह प्रक्रिया का भी जिक्र

संगठन के अनुसार, पीएलआई का मुद्दा मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष सुलह प्रक्रिया में है और दिल्ली उच्च न्यायालय में भी लंबित है। यूएफबीयू ने आरोप लगाया कि सुलह प्रक्रिया के बावजूद वित्तीय सेवा विभाग ने बैंकों को सरकार की प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना लागू करने की सलाह दी है।

यूनियन का दावा है कि बैंकों में इस योजना के तहत पीएलआई का भुगतान शुरू भी हो गया है। संगठन ने इसे सुलह प्रक्रिया के दौरान यथास्थिति बनाए रखने की बाध्यता के विपरीत बताया है।

यूएफबीयू का कहना है कि मौजूदा पीएलआई व्यवस्था से अधिकारियों के एक छोटे वर्ग को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिल सकता है और विभिन्न संवर्गों के बीच प्रोत्साहन में समानता का सिद्धांत प्रभावित होगा।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply