
सूरतगंज/बाराबंकी, अमृत विचार। यूपी के बाराबंकी में सरयू नदी का बढ़ता जलस्तर भले ही बुधवार को 49 सेमी ऊपर जाने के बाद घटने लगा, लेकिन तेज कटान ने रामनगर तहसील क्षेत्र में हालात गंभीर कर दिए हैं। नदी किनारे बसे गांवों में जलभराव के साथ कटान से ग्रामीणों में दहशत है। तीन मकान नदी की आगोश में समा गए, वहीं कई कटान के निशाने पर आ गए हैं।
बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र में सरयू नदी की तेज कटान से नदी किनारे ढहा मकान, मलबे में तब्दील हुआ आशियाना।
हेतमापुर में सबसे भयावह हालात
सबसे भयावह स्थिति हेतमापुर में बनी हुई है। सरयू की तेज धारा लगातार रिहायशी क्षेत्र की जमीन काट रही है। कटान की चपेट में आकर एक्सचेंज बिल्डिंग, हनुमान मंदिर समेत तीन पक्के मकान नदी में समा चुके हैं। कई अन्य पक्के और कच्चे मकान भी कटान के मुहाने पर पहुंच गए हैं। बढ़ती कटान को देखते हुए कई परिवार अपने आशियाने बचाने की उम्मीद छोड़कर मकानों को खुद तोड़कर ईंट, सरिया, लकड़ी, दरवाजे और अन्य सामान सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।
कहीं लोग हथौड़े से दीवारें तोड़ रहे हैं तो कहीं घर का जरूरी सामान बाहर निकाला जा रहा है। वर्षों की मेहनत से बनाए गए घरों को अपनी आंखों के सामने नदी में समाते देख ग्रामीणों में भय और मायूसी का माहौल है। ग्रामीणों के मुताबिक कटान जिस तेजी से रिहायशी इलाके की ओर बढ़ रहा है, उससे दिनरात अनहोनी की आशंका बनी हुई है। लोग बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही घरों का सामान समेटने में जुटे हैं।
1400 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था
इधर, बाढ़ प्रभावित सुन्दरनगर, कोड़री, ललपुरवा, सरसंडा और उधिया के करीब 1400 लोगों के लिए प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई है। वहीं जलभराव के कारण प्रभावित मार्गों पर आवागमन सुचारु रखने के लिए बतनेरा, जमका, डिहुवा, विझला और बल्लोपुर में करीब 30 नावों का संचालन कराया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थाएं लगातार सक्रिय रखी जा रही हैं।



