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​Barabanki Flood : हेतमापुर में आंखों के सामने बह गए आशियाने, अब मस्जिद पर मंडराया खतरा; नाव पर घड़ियाल ने किया हमला

​Barabanki Flood : हेतमापुर में आंखों के सामने बह गए आशियाने, अब मस्जिद पर मंडराया खतरा; नाव पर घड़ियाल ने किया हमला

सूरतगंज/बाराबंकी, अमृत विचार। सरयू नदी गुरुवार को लाल निशान से 32 सेमी ऊपर बही। हेतमापुर में नदी का कहर जारी है। लगातार भीषण कटान ने लोगों की आंखों के सामने उनके आशियानों को निगल लिया। घरों के नदी में समाने के बाद अब कटान की जद में मस्जिद भी आ गई है।

कटान के तेवर देखते हुए मस्जिद के कुछ ही समय में कटान की चपेट में आने के पूरे आसार हैं। ग्रामीणों को अपने ही हाथों से अपने घरों को तोड़कर ईंटपत्थर और गृहस्थी का सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ रहा, जो बहुत ही भावुक कर देने वाला नजारा है।

 नदी लगातार किनारे की जमीन काटते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है। जिन दीवारों को ग्रामीणों ने वर्षों की कमाई और मेहनत से खड़ा किया, उन्हीं दीवारों को अपने हाथों से तोड़ते हुए उनकी आंखें नम हैं। कोई घर की ईंटें निकाल रहा है तो कोई छप्पर दरवाजे और गृहस्थी का सामान समेटकर सुरक्षित जगह पहुंचा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जिस जमीन पर परिवार का पालनपोषण होता था वह भी अब नदी की धारा में गायब होती जा रही है। 

इस बीच प्रशासन और बाढ़ विभाग ने कटान रोकने के प्रयास तेज किए हैं मौके पर जेसीबी और ट्रैक्टरट्रॉलियों की मदद से पत्थर व ईंटें डालकर नदी के कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। नदी के किनारे संवेदनशील स्थानों पर लगातार सामग्री पहुंचाई जा रही है। हालांकि नदी की तेज धारा और लगातार कटान के बीच चुनौती भी बड़ी है। एक तरफ बचाव कार्य चल रहा तो दूसरी तरफ नदी लगातार नई जमीन को अपनी धारा में समेटती जा रही है। 

सुई से जंग लड़ता रहा बाढ़ कार्यखंड 

करीब 25 साल तक बाढ़ कार्यखंड सुई से जंग फतह करने की कोशिश में लगा रहा और सीतापुर से आते ही हेतमापुर को ठोकर मारते हुए नया रास्ता बनाने वाली सरयू नदी ने अपना दायरा कई किलोमीटर कर लिया। आज हेतमापुर का नामोनिशान मिटाने को नदी आतुर है तो यह विभाग की ही देन है। विभाग ने गंभीरता दिखाई, न ईमानदारी से बचाव कार्य किए।

बताते चलें कि पड़ोसी जिले सीतापुर से बहकर आई घाघरा उर्फ सरयू नदी ने बाराबंकी में सूरतगंज क्षेत्र स्थित कस्बा हेतमापुर के किनारे को अपना मोड़ बनाया और यहीं से रास्ता बदल लिया। करीब ढाई दशक पहले मिट्टी की बोरियां व ईंटों का अंबार लगाकर नदी का प्रवाह रोकने की कोशिश बाढ़ कार्यखंड ने की पर स्थाई समाधान नहीं निकाला गया। हर साल नदी हेतमापुर को ठोकर मारते हुए धारा बदलती रही और विभाग ऐन बाढ़ के वक्त ही सक्रिय दिखा।

ढाई दशक के बीच कभी अधिक तो कभी कम होते जलस्तर ने हेतमापुर को खासा नुकसान पहुंचाया। करीब एक दशक पहले लाल निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर गए जलस्तर ने इस इलाके को डुबो दिया था। घटने के बाद सब सामान्य हुआ। मान्यता के अनुसार बाबा नारायण दास समाधि स्थल तक नदी का पानी कभी नहीं पहुंचना था पर विभागीय लापरवाही के चलते आज नदी समाधि स्थल से कुछ ही दूरी पर बह रही है। 

नाव पर घड़ियाल का हमला, मेडिकल टीम सकुशल

रामसनेहीघाट : बाढ़ प्रभावित रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र के मारून गांव में ग्रामीणों को दवा पहुंचाने निकली स्वास्थ्य विभाग की टीम बालबाल बच गई, नदी में तैरते करीब 10 फीट लंबे घड़ियाल ने नाव पर सवार टीम पर हमला कर दिया, हालांकि सक्रिय नाविक ने डंडी के सहारे उसे ठेल दिया। नायब तहसीलदार उमेश द्विवेदी के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीणों को दवाएं और जरूरी स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए चार सदस्यीय टीम नाव से जा रही थी।

इसी दौरान नदी में घड़ियाल अचानक नाव के बेहद करीब आ गया और उसने नाव पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से स्वास्थ्यकर्मी घबरा गए, लेकिन नाव चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए एक डंडी से घड़ियाल को दूर किया। इसके बाद नाव सुरक्षित आगे निकल गई। घटना में कोई स्वास्थ्यकर्मी के चोटहिल नहीं हुआ। बाढ़ के बीच घड़ियाल के नाव पर हमले की घटना से इलाके में दहशत है।

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