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​Barabanki News: 10 साल पुराने PRD जवान हत्याकांड में चार दोषमुक्त, CCTV और फॉरेंसिक साक्ष्य पर उठे सवाल

​Barabanki News: 10 साल पुराने PRD जवान हत्याकांड में चार दोषमुक्त, CCTV और फॉरेंसिक साक्ष्य पर उठे सवाल

बाराबंकी, अमृत विचार: जिला सहकारी बैंक में करीब 10 साल पहले हुई दो पीआरडी जवानों की गला रेतकर हत्या और डकैती के प्रयास के चर्चित मामले में अदालत ने पुलिस विवेचना की खामियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वैज्ञानिक साक्ष्यों की कड़ी कमजोर होने और अभियोजन द्वारा आरोपों को ठोस रूप से साबित न कर पाने के कारण अदालत ने कलीम कुरैशी, सरवर, पंकज वर्मा और वहाजुद्दीन उर्फ बादशाह को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने विशेष रूप से बरामद हथियार और कपड़ों की विधि विज्ञान प्रयोगशाला से जांच की रिपोर्ट पेश न किए जाने तथा बैंक के CCTV फुटेज को विवेचना में शामिल नहीं किए जाने को महत्वपूर्ण माना।

मामला 5 अप्रैल 2016 का है। शहर के जिला सहकारी बैंक में सुरक्षा के लिए तैनात पीआरडी जवान ओमप्रकाश और देशराज की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद बदमाशों ने बैंक की तिजोरी खोलने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं खुल सकी। बैंक के चपरासी शत्रुघ्न प्रसाद की तहरीर पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने 15 अप्रैल 2016 को घटना का खुलासा करने का दावा करते हुए मसौली के कसाई टोला निवासी कलीम कुरैशी, बड़ागांव के सरवर, जहांगीराबाद के पंकज वर्मा, बड़ागांव निवासी वहाजुद्दीन उर्फ बादशाह और नाज मोहम्मद को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने सभी को वारदात में शामिल बताते हुए आरोपपत्र दाखिल किया। इनमें एक आरोपी के किशोर होने के कारण उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत के सामने यह तथ्य आया कि पुलिस ने जिन हथियारों और कपड़ों की बरामदगी को केस का अहम हिस्सा बनाया, उन्हें विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जाने और उनकी जांच से संबंधित कोई रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की गई। ऐसे में बरामद वस्तुओं को आरोपियों से जोड़ने वाली वैज्ञानिक कड़ी स्थापित नहीं हो सकी। अदालत ने बैंक में लगे CCTV कैमरों के फुटेज को भी विवेचना का हिस्सा नहीं बनाए जाने पर सवाल उठाया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि घटना बैंक के भीतर हुई थी और CCTV फुटेज महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य हो सकता था, लेकिन इसे अभियोजन साक्ष्य के रूप में पेश नहीं किया गया।

अभियोजन की ओर से बैंक कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों समेत करीब 13 गवाह पेश किए गए। हालांकि अदालत ने माना कि केवल अनुमान और कल्पना के आधार पर साक्ष्य स्वीकार नहीं किया जा सकता। अभियोजन यह भी ठोस रूप से साबित नहीं कर सका कि दोनों पीआरडी जवानों की हत्या बैंक लूटने के उद्देश्य से ही की गई थी। मामले की करीब 10 साल तक सुनवाई चली। बचाव पक्ष की दलीलों और विवेचना में सामने आई कमियों पर विचार करने के बाद असद अहमद हाशमी ने आरोपी कलीम कुरैशी, सरवर, पंकज वर्मा और वहाजुद्दीन उर्फ बादशाह को दोषमुक्त कर दिया। नाज मोहम्मद की पत्रावली पहले ही अलग कर दी गई थी।

सुनवाई के दौरान एक विवेचक की गवाही का हिस्सा भी सामने आया। विवेचक ने बताया कि सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर बैंक में शराब पीने और लड़कियों के आने की बात केस डायरी में दर्ज की गई थी। हालांकि अभियोजन इन बातों का दोनों पीआरडी जवानों की हत्या और बैंक में डकैती के प्रयास से प्रत्यक्ष संबंध ठोस साक्ष्यों के जरिए स्थापित नहीं कर सका। अदालत के फैसले ने करीब एक दशक पुराने इस चर्चित हत्याकांड की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों की अनदेखी और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को अदालत तक न पहुंचाए जाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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