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सावधान! टैक्स बचाने के चक्कर में कहीं जेल न जाना पड़े, ITR Filing 2026 में फर्जी डिडक्शन पर कड़ा एक्शन

हर साल, कई टैक्सपेयर्स अपनी टैक्स देनदारी कम करने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न में डिडक्शन को बढ़ाचढ़ाकर या गलत तरीके से क्लेम करने का प्रयास करते हैं. कई लोग ऐसे ऐसे इन्वेस्टमेंट के लिए डिडक्शन क्लेम करने की कोशिश करते हैं जो उन्होंने कभी किए ही नहीं. जिसमें मेडिकल या एजुकेशन खर्चों को बढ़ाचढ़ाकर बताना या नकली रसीदें दिखाना शामिल सकता है.

सावधान! टैक्स बचाने के चक्कर में कहीं जेल न जाना पड़े, ITR Filing 2026 में फर्जी डिडक्शन पर कड़ा एक्शन

भले ही टैक्स बचाने के लिए ये तरीके काफी आसान तरीका लग सकते हैं, लेकिन इनकमटैक्स एक्ट के तहत इनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. गलती की गंभीरता के आधार पर, ऐसे टैक्सपेयर्स पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है या जानबूझकर टैक्स चोरी के मामलों में जेल भी हो सकती है.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब डाटाबेस्ड हो गया है और हर साल टैक्स रिटर्न में किए गए इन क्लेम को वेरिफाई करने के लिए एम्प्लॉयर, बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट और फॉर्म 26AS जैसे डॉक्यूमेंट्स से मिली जानकारी का इस्तेमाल करता है.

अगर IT डिपार्टमेंट को कोई गलत एंट्री मिलती है तो क्या होता है?

इनकमटैक्स एक्ट की धारा 271एएडी के तहत, अगर असेसमेंट या किसी अन्य कार्यवाही के दौरान टैक्स डिपार्टमेंट को पता चलता है कि किसी टैक्सपेयर ने अपनी अकाउंट बुक्स में कोई गलत एंट्री की है या टैक्स देनदारी कम करने के लिए जानबूझकर कोई एंट्री नहीं की है, तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट के अनुसार, ऐसे मामलों में गलत या छोड़ी गई एंट्री की वैल्यू के 100 फीसदी के बराबर जुर्माने का भी प्रावधान है. इससे नकली डिडक्शन क्लेम करने या इनकम छिपाने की कॉस्ट, संभावित टैक्स सेविंग की तुलना में कहीं अधिक हो जाती है.

इनकम की अंडररिपोर्टिंग और मिसरिपोर्टिंग के बीच अंतर

वहीं, धारा 270ए इनकम की अंडररिपोर्टिंग और मिसरिपोर्टिंग से संबंधित है. ये प्रावधान उन स्थितियों को डिफाइन करते हैं जिनमें जुर्माना लगाया जा सकता है, लागू होने वाली दरें और टैक्सपेयर्स के लिए सेफगार्ड उपाय क्या हैं.

इनकम की अंडररिपोर्टिंग का मतलब उन स्थितियों से है जिनमें टैक्सपेयर टैक्स अधिकारियों द्वारा आंकी गई इनकम से कम इनकम बताता है, जो अक्सर जानकारी छूटने, गलत क्लेम या कैलकुलेशन की गलतियों के कारण होता है.

इनकम की मिसरिपोर्टिंग में फैक्ट्स को जानबूझकर छिपाना या गलत तरीके से पेश करना शामिल है. इसमें इनकम छिपाना, फर्जी खर्च दिखाना या ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड न करना जैसे मामले शामिल हैं.

इनकम की अंडररिपोर्टिंग और मिसरिपोर्टिंग के लिए जुर्माना

इनकम की अंडररिपोर्टिंग: ऐसी गलती पर उस इनकम पर देय टैक्स का 50 फीसदी जुर्माना लगता है.

इनकम की मिसरिपोर्टिंग: अगर कोई टैक्सपेयर अपनी इनकम की गलत रिपोर्टिंग करता है, तो देय टैक्स का 200 फीसदी अधिक जुर्माना लगाया जाएगा. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स चोरी करने वाले टैक्सपेयर्स पर जुर्माना लगाने के लिए ये नियम लागू किए हैं.

क्या टैक्स चोरी के लिए जेल हो सकती है?

जब टैक्स अधिकारी यह तय करते हैं कि किसी टैक्सपेयर ने जानबूझकर फर्जी डिडक्शन या गलत क्लेम्स के जरिए टैक्स चोरी करने की कोशिश की है, तो उस टैक्सपेयर के खिलाफ सेक्शन 276सी और 277 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है.

सेक्शन 276C के तहत, जानबूझकर टैक्स चोरी करने की कोशिश का दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को तीन महीने से लेकर सात साल तक की जेल हो सकती है. यह सज़ा चोरी की गई टैक्स की रकम पर निर्भर करती है.

सेक्शन 277 वेरिफिकेशन या डॉक्यूमेंटेशन में गलत जानकारी देने से जुड़ा है और इसके लिए जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं. कानूनी कार्रवाई आम तौर पर बड़े पैमाने पर फ्रॉड या बारबार नियमों का पालन न करने के मामलों में की जाती है. इनमें अक्सर फर्जी डॉक्यूमेंट या ऐसे प्रोफेशनल मिडिएटर शामिल होते हैं जो फर्जी दावे बनाने में मदद करते हैं.

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