Mother’s Day 2026: एक औरत को सबसे ज्यादा गुमान अपने पति पर होता है, लेकिन शादी के चंद साल बाद ही जब किसी औरत को उसका पति छोड़ दे तो उसके ऊपर क्या गुजरेगी? कुछ ऐसे ही जीवन को झकझोर देने वाले हालात से बिहार की राजधानी पटना की सितु सितु मढ़ातिया गुजरी हैं. तमाम झंझावात को भी झेलते हुए सितु की पहचान आज की तारीख में एक ऐसी मां की है, जो न केवल एक सफल बिजनेस वूमेन है, बल्कि उन्होंने अपने दम पर अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दी. आज की तारीख में उनकी बेटी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जैसे नेशनल इंर्पोटेंस वाले संस्थान में स्टडी कर रही है.

पटना के जमाल रोड में रहने वाली सितु मेढातिया भी वैसे ही महिलाओं में से एक हैं, जिसने जीवन की शुरुआती दौर में शादी के सपने सजाए थे. इनके दिल और दिमाग में एक केयर करने वाला पति और एक खुशहाल परिवार का सपना था, लेकिन वह शायद सपना ही रह गया. सितु ने अपनी शादी के बाद जिन सपनों को देखा था, वह साकार तो नहीं हुए, लेकिन ऊपर वाले ने उनके हिस्से की जिंदगी में से खुशियों के कुछ पल को बचा के रखा हुआ था.
2004 में हुआ पहला बच्चा
सितु बताती हैं, 2002 में उनकी शादी हुई थी. 2004 में उनका पहला बच्चा हुआ. शादी के पहले से ही उनके हस्बैंड का उनके प्रति रवैया कुछ खास नहीं रहता था, लेकिन फिर भी वह खुद को दिलासा देती थी कि वक्त के साथ सब बेहतर हो जाएगा. इसी बीच में उनके परिवार में एक नन्ही कली भी आई. सितु के हसबैंड का रुझान तब भी वैसा ही रहा. सितु ने तब फिर अपने दिल को दिलासा दिलाया कि शायद संतान को देखकर के उनके हस्बैंड की काठ हो चुकी संवेदना में कुछ जान आ जाए.
पहली तलाक याचिका खारिज
वह कहती हैं, उनके जीवन का वह लम्हा सबसे खराब लम्हा था, जब उन्हें यह जानकारी मिली कि उनके पति की जिंदगी में पहले से कोई और महिला है. इतना ही नहीं, उस महिला से उनकी संतान भी है. सितु बताती हैं, उनके पति का रवैया शादी के बाद से ही सही नहीं था. 2007 आतेआते उन्होंने डाइवोर्स के लिए आवेदन भी दे दिया. हालांकि, पहले आवेदन को कुछ मानकों पर खरा नहीं उतरता देख कोर्ट ने खारिज कर दिया.
2020 में हो गया तलाक
अगले दो साल तक सितु के मन में सब कुछ बेहतर होने की उम्मीद लगी रही, लेकिन 2011 में आखिर वह मनहूस दिन भी आ गया, जब उनके पति ने दोबारा डाइवोर्स फाइल कर दिया. सितु कहती हैं, साल दर साल उन्होंने तलाक के दुख को झेला लेकिन अंतत नौ साल के अंतराल के बाद 2020 में उनका तलाक हो गया. इस दौर को देखने के बाद मन में न जाने कितने ख्याल आए, जो ज्यादातर बुरे ही होते थे, लेकिन मैं अपनी संतान का चेहरा देखती थी.
‘पति की तरफ से नहीं मिली मदद’
जिंदगी जीने के लिए मुझे कुछ करना था. तलाक के बाद मुझे कोई मुआवजा और एल्यूमिनी भी नहीं मिली. सब कुछ नए सिरे से करना था. घर के लोग तो साथ खड़े थे, लेकिन ससुराल के लोग और तकरीबन 90 प्रतिशत समाज ने मेरा साथ नहीं दिया. नम आंखों के साथ सितु बताती हैं, जब तलाक के लिए उनके पति ने आवेदन दिया, तब उनकी बेटी महज दो साल की थी और जब 2020 में तलाक पर अदालत की मोहर लगी, तब तक उनकी बेटी उस दौर में पहुंच चुकी थी, जहां वह बातों को समझ सके.
अंगूठी बेचकर कराया बेटी का एडमिशन
जब दूसरे बच्चे अपने पिताजी की गोद में जाते थे तो मेरी बेटी भी मचल जाती थी, लेकिन मैंने उसके लिए मां और पिता दोनों का फर्ज अदा किया. वह कहती है, जब स्कूल में पहली बार नाम लिखवाने का वक्त आया था तब मेरे पास पैसे नहीं थे. मेरे पास एक सोने की अंगूठी थी. मैंने उसे बेच दिया और उसी पैसे से बेटी का एडमिशन कराया. शुरू से मैंने केवल दो ही चीजों का ख्याल रखा, अच्छे संस्कार और अच्छी पढ़ाई.
‘राधे रसोई’ की शुरुआत
शायद उसी का नतीजा है कि क्लास वन से लेकर अब तक मेरी बेटी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. देश भर से कई संस्थानों से स्कॉलरशीप हासिल कर चुकी है. आज की तारीख में वह नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, पटना में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की स्टडी कर रही है. सितु यह भी कहती हैं, मुझे सब कुछ नए सिरे से शुरू करना था. आर्थिक रूप से मजबूत भी बनना था. फिर मैंने राधे रसोई के नाम से अपना बिजनेस शुरू किया.
बहुत छोटे स्तर से, लेकिन शायद लोगों को मेरे हाथ का बना स्वाद पसंद आया. धीरेधीरे यह कारवां बढ़ता रहा. आज मैं ठीकठाक पोजीशन पर हूं. ठीक ठाक संख्या में लोगों के लिए खाना बनाकर सप्लाई करती हूं. अब मुझे दूसरे जगह से स्टॉल लगाने के भी ऑफर आ रहे हैं. शुरू में मैंने अपनी बेटी के साथ इसे शुरू किया था. प्रचार प्रसार के लिए सोशल प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल किया. धीरेधीरे मेरी मेहनत रंग ला रही और अब लोग मुझे राधे रसोई वाली आंटी के नाम से भी जानते हैं.
वह कहती हैं, किसी भी औरत के लिए वह वक्त सबसे खराब होता है जब उसके अपने ही साथ छोड़ देते हैं लेकिन वही वक्त उसकी मजबूती का कारण भी बन जाते हैं. मेरे अपनों ने मेरा साथ छोड़ा था, लेकिन मैंने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई.



