अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. देश की सबसे बड़ी साधुसंत संस्था मानी जाने वाली अखाड़ा परिषद में वर्चस्व की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है. परिषद के दोनों गुट एकदूसरे को असली संगठन बताने में जुटे हैं और संत समाज में इसे लेकर सियासी और धार्मिक हलचल तेज हो गई है.

हाल ही में हरिद्वार में निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने नया उदासीन अखाड़े के पंजाब गुट के कुछ संतों के साथ बैठक कर आठ के समर्थन का दावा किया था. उन्होंने अपने गुट को ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का वास्तविक स्वरूप बताते हुए दूसरे पक्ष की वैधता पर सवाल उठाए थे.
महंत रविंद्र पुरी के दावों को किया खारिज
महंत रविंद्र पुरी के इस दावे के बाद अब दूसरा गुट भी पूरी ताकत के साथ सामने आ गया है. रविवार को प्रयागराज के कीडगंज स्थित श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़े के मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष महंत श्री दुर्गादास जी महाराज ने की, जिसमें महानिर्वाणी, निर्मल, निर्मोही सहित कई प्रमुख अखाड़ों के संतों ने भाग लिया.
बैठक के बाद महंत दुर्गादास महाराज ने महंत रविंद्र पुरी के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया. उनका कहना था कि जिन संतों के समर्थन का दावा किया जा रहा है, उनमें से संत रघु मुनि दास समेत कुछ संतों को वर्ष 2023 में नया उदासीन अखाड़े से निष्कासित किया जा चुका है. ऐसे में उनके समर्थन का दावा भ्रामक और तथ्यहीन है.
10 अखाड़ों का समर्थन… महंत दुर्गादास ने किया दावा
महंत दुर्गादास ने दावा किया कि उनके गुट को 10 अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है. इनमें महानिर्वाणी, अटल, आवाहन, अग्नि, निर्मोही अनि, निर्वाणी अनि, दिगंबर अनि, निर्मल, बड़ा उदासीन और नया उदासीन अखाड़े शामिल हैं. वहीं उन्होंने कहा कि महंत रविंद्र पुरी के साथ केवल जूना, निरंजनी और आनंद अखाड़े का समर्थन है.
महंत दुर्गादास ने स्पष्ट किया कि आगामी हरिद्वार, नासिक और उज्जैन कुंभ के आयोजन उनके गुट के नेतृत्व में ही संपन्न कराए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में कुंभ आयोजन वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजा जाएगा. यदि इसके बाद भी दूसरा गुट विवाद खड़ा करता है, तो मामला अदालत में ले जाया जाएगा. ऐसे में अखाड़ा परिषद का यह विवाद अब धार्मिक मंच से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाई का रूप भी ले सकता है.



