
अक्सर 50 या 60 की उम्र पार करते ही हमारे समाज में एक सलाह आम हो जाती है कि अब ज्यादा मत चलो, घुटने घिस जाएंगे!’ लेकिन क्या वाकई बढ़ती उम्र में रोज 2-3 किलोमीटर की सैर करना आपके घुटनों और कूल्हों को खराब कर सकती है या फिर यह आपको लंबे समय तक चुस्त-दुरुस्त रखने का सबसे बेहतरीन जरिया है? इस उलझन को दूर करने के लिए ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट्स से इस मिथ की सच्चाई जानने की कोशिश की।
ISIC Multispeciality हॉस्पिटल में कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स डॉ. अपूर्व दुआ के मुताबिक पैदल चलना एक लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है, जो बुजुर्गों के लिए आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है। हेल्दी कपल्स को नियमित रूप से बॉडी को एक्टिव रखना जरूरी है। जब तक गंभीर गठिया, चोट या लगातार दर्द की समस्या न हो, रोजाना 3-4 मील चलना नुकसान की बजाय फायदा पहुंचा सकता है।
क्या पैदल चलने से जोड़ों को नुकसान होता है या फायदा?
एक्सपर्ट ने बताया कई लोगों को लगता है कि ज्यादा चलने से जोड़ों का घिसाव बढ़ जाता है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। नियमित वॉक जोड़ों को हेल्दी रखने में मदद करती है। डॉ. दुआ बताते हैं कि पैदल चलने से जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, लचीलापन बढ़ता है, वजन कंट्रोल रहता है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इसके अलावा हेल्दी वेट बनाए रखने से घुटनों और कूल्हों पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता। एक्सपर्ट के मुताबिक अधिकांश लोगों के लिए वॉक के फायदे इसके संभावित जोखिमों से कहीं ज्यादा होते हैं। निष्क्रिय लाइफस्टाइल की तुलना में बॉडी को एक्टिव रखना जोड़ों के लिए बेहतर माना जाता है।
क्या रोज चलने से गठिया हो सकता है?
कई लोग यह मानते हैं कि सालों तक पैदल चलने से गठिया की बीमारी हो सकती है, लेकिन एक्सपर्ट इस धारणा को गलत बताते हैं। डॉ. दुआ के अनुसार रोजाना पैदल चलना गठिया का कारण नहीं बनता, बल्कि यह जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने, मांसपेशियों को मजबूत रखने और हेल्दी वेट बनाए रखने में मदद करता है, जिससे जोड़ों से जुड़ी कई समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।
कब समझें कि आप जरूरत से ज्यादा चल रहे हैं?
जरूरत से ज्यादा बॉडी से काम लेंगें तो बॉडी पर दबाव पड़ना संभव है। एक्सपर्ट ने बताया अगर आप बॉडी में होने वाले दर्द को नजरअंदाज करेंगे तो बॉडी में कई तरह की परेशानियां बढ़ सकती है। एक्सपर्ट ने बताया शरीर पर अधिक दबाव पड़ने पर कुछ परेशानियां जैसे
- जोड़ों में लगातार दर्द
- सूजन
- कई घंटों तक रहने वाली अकड़न
- लंगड़ाकर चलना
- चलने-फिरने में कमी आना
- आराम करने के बाद भी दर्द बने रहने जैसी दिक्क्तें हो सकती है।
यदि पैदल चलना आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने लगे या शरीर को रिकवर होने में अधिक समय लगने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बुजुर्ग अपने घुटनों और कूल्हों को कैसे सुरक्षित रखें?
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ आसान सावधानियां अपनाकर बुजुर्ग लंबे समय तक आराम से पैदल चल सकते हैं।
- आरामदायक और सपोर्टिव जूते पहनें
- समतल रास्तों पर चलें
- हेल्दी वजन बनाए रखें
- पर्याप्त पानी पिएं
- स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करें
- दूरी धीरे-धीरे बढ़ाएं
- जरूरत पड़ने पर आराम करें
- दर्द होने पर उसे नजरअंदाज न करें
डॉ. का कहना है कि सही तरीके से की गई नियमित वॉक घुटनों और कूल्हों को घिसने की बजाय लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ द्वारा साझा किए गए विचार उनके व्यक्तिगत अनुभव और चिकित्सकीय अध्ययन पर आधारित हैं। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, मेडिकल हिस्ट्री और जोड़ों का स्वास्थ्य अलग होता है। इसलिए, बढ़ती उम्र में कोई भी नया व्यायाम या रनिंग/वॉकिंग रूटीन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से व्यक्तिगत परामर्श ज़रूर लें।

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