Bharat Tiwari Encounter Controversy: बिहार के भोजपुर जिले में हुए एक पुलिस एनकाउंटर को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई के बाद मौत हो गई, जिसके चलते पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि जिस व्यक्ति को एक दिन पहले पुलिस ने मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया था, अगले ही दिन उसी के खिलाफ एनकाउंटर की कार्रवाई की गई।

भोजपुर पुलिस ने 16 जून को जारी अपने बयान में कहा था कि भरत भूषण तिवारी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और उन्हें इलाज के लिए मानसिक आरोग्यशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस का यह भी कहना था कि उनके पास मौजूद हथियार को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय घटना को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शाहपुर थाना को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति हथियार लेकर घूम रहा है ।इस सूचना के सत्यापन हेतु जब शाहपुर थाना की पुलिस टीम संबंधित व्यक्ति के घर पहुँची , तब यह तथ्य सामने आया कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वथ है। pic.twitter.com/AesiPvIBZz
— Bhojpur Police June 16, 2026
इससे पहले भरत भूषण ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर सरकारी कामकाज को लेकर नाराजगी जाहिर की थी और एक अधिकारी के ‘एनकाउंटर’ की बात कही थी। पोस्ट वायरल होने के बाद पुलिस उनके घर पहुंची थी।
आत्मसमर्पण की कोशिश या पुलिस पर फायरिंग?
17 जून की सुबह पुलिस और एसटीएफ की टीम ने भरत भूषण को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा। भोजपुर पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भरत हाथ में पिस्टल लेकर हवाई फायरिंग कर रहा था और बारबार चेतावनी दिए जाने के बावजूद फायरिंग जारी रखे हुए था। पुलिस का दावा है कि आम लोगों और सुरक्षाबलों की सुरक्षा को देखते हुए आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। पुलिस के मुताबिक, एसटीएफ जवानों ने बुलेटप्रूफ जैकेट के साथ क्लोज कॉर्डनिंग की, लेकिन भरत भूषण ने फायरिंग जारी रखी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
फेसबुक लाइव बना विवाद का केंद्र
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। एनकाउंटर से पहले भरत भूषण अपने फेसबुक अकाउंट से लगातार लाइव आ रहे थे और घटनाक्रम को सार्वजनिक कर रहे थे। एक वीडियो में वह पुलिस से कुछ दूरी पर खड़े दिखाई देते हैं और कथित तौर पर अपनी पिस्टल पुलिस की दिशा में फेंकते नजर आते हैं। हालांकि वीडियो उसी समय समाप्त हो जाता है। गौरतलब है कि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जबकि पुलिस का दावा है कि भरत भूषण लगातार रुकरुककर फायरिंग कर रहे थे।
दिनांक17.06.2026 को पुलिस द्वारा की कार्रवाई की अद्यतन स्थिति :#HainTaiyaarHum #BiharPolice @bihar_police @IPRDBihar pic.twitter.com/nOyzWoxyNV
— Bhojpur Police June 17, 2026
इलाज के दौरान हुई मौत
पुलिस कार्रवाई में घायल होने के बाद भरत भूषण को इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के चिकित्सक एमएच अंसारी के अनुसार, उन्हें कमर के निचले हिस्से में चार गोलियां लगी थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
भरत भूषण के पिता कासीनाथ तिवारी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके बेटे को जानबूझकर निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि उनका बेटा कोई अपराधी नहीं था, बल्कि उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय उन्हें थाने में बैठाकर रखा गया और बाद में केवल यह जानकारी दी गई कि उनके बेटे के पैर में गोली लगी है।
भरत तिवारी की मां
वहीं भरत भूषण की मां आशा देवी ने भी की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे ने स्थानीय समस्याओं को उठाया था और यदि उसने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो फिर उसके खिलाफ गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी।
सम्राट चौधरी ने दिए न्यायिक जांच के आदेश
सरकार ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने का ऐलान लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब एनकाउंटर से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी।
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने से भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई है। बिहार सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि न्यायिक जांच का मुख्य उद्देश्य घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना है। सरकार जनता के बीच उठ रहे सभी सवालों का निष्पक्ष उत्तर देना चाहती है।
जांच और सवाल जारी
घटना के बाद पुलिस और परिवार के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। एक ओर पुलिस आत्मरक्षा में कार्रवाई करने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन इसे योजनाबद्ध कार्रवाई बता रहे हैं। ऐसे में यह मामला अब राज्य में पुलिस कार्रवाई और उसकी पारदर्शिता को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।



