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17 करोड़ के फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई, महिला डॉक्टर के बाद SDM ऑफिस और तहसील के 3 कर्मचारी गिरफ्तार..

17 करोड़ के फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई, महिला डॉक्टर के बाद SDM ऑफिस और तहसील के 3 कर्मचारी गिरफ्तार..

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस ने इस मामले में पहले फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने की आरोपी महिला डॉक्टर को गिरफ्तार किया था। अब जांच के दायरे में राजस्व विभाग के कर्मचारी भी आ गए हैं। पुलिस ने एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।

जांच के अनुसार, कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार कर सामान्य मौतों को सर्पदंश से हुई मौत दिखाया गया, जिसके आधार पर करोड़ों रुपये का सरकारी मुआवजा जारी कराया गया। पुलिस का दावा है कि इस पूरे मामले में करीब 17.24 करोड़ रुपये के मुआवजे में अनियमितताओं की जांच की जा रही है।

मामले को विधानसभा में उठाए जाने के बाद प्रशासन ने जांच तेज कर दी। अब तक इस प्रकरण में 14 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले हर व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक लॉगिन और रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर कथित रूप से फर्जी प्रकरण दर्ज किए और मुआवजा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। वहीं, इस मामले में पहले सिम्स की तत्कालीन महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। उन पर कथित तौर पर फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में मृतकों के परिजनों की जानकारी या सहमति के बिना भी मुआवजा राशि निकाले जाने की आशंका है। पुलिस इन सभी मामलों के दस्तावेजों की जांच कर रही है।

पुलिस का दावा है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। जांच में तहसील कार्यालय से जुड़े एक चालक, कुछ अधिवक्ताओं, बैंककर्मियों और अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कुछ संदिग्धों की तलाश जारी है।

फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग सभी संदिग्ध मामलों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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