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संभल में 101 करोड़ की सरकारी जमीन घोटाले पर बड़ा एक्शन, पूर्व ईओ समेत 32 पर FIR

Sambhal land fraud Case: उत्तर प्रदेश के संभल में 101 करोड़ रुपये कीमत की ग्राम सभा की जमीन पर फर्जीवाड़े के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. 38 बीघा सरकारी जमीन को फर्जी पट्टों के जरिए अपने नाम पर दर्ज कराने के आरोप में तत्कालीन नगर पालिका के पूर्व ईओ, पूर्व चेयरमैन के परिजनों, एक बसपा नेता के बेटों समेत 32 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. जिलाधिकारी के निर्देश पर जमीन को दोबारा ग्राम सभा के नाम दर्ज कर सरकारी कब्जे में ले लिया गया है.

संभल में 101 करोड़ की सरकारी जमीन घोटाले पर बड़ा एक्शन, पूर्व ईओ समेत 32 पर FIR

संभल जिले के रायसत्ती थाना क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं में करीब 101 करोड़ रुपये मूल्य की 38 बीघा ग्राम सभा की भूमि पर कथित कब्जे और फर्जीवाड़े के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. सदर कोतवाली में लेखपाल स्पर्श गुप्ता की तहरीर पर 32 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.

33 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

एफआईआर में तत्कालीन नगर पालिका संभल के पूर्व अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता, पूर्व चेयरमैन के दामाद और भतीजे, एक बसपा नेता के तीन बेटे, चकबंदी विभाग के कर्मचारी और अन्य लोगों को नामजद किया गया है. प्रशासनिक जांच में सामने आया कि वर्ष 1967 में नगर पालिका ने कथित रूप से अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियमों के विपरीत फर्जी पट्टे जारी किए थे. इन्हीं पट्टों के आधार पर वर्ष 2008 में नामांतरण कराकर ग्राम सभा की जमीन को निजी खातेदारों के नाम दर्ज करा लिया गया.

कोर्ट के आदेश के बाद एक्शन

बाद में उप संचालक चकबंदी न्यायालय के आदेश के बाद खतौनी से निजी नाम हटाकर जमीन को दोबारा ग्राम सभा के नाम दर्ज किया गया. इसके बाद जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई की मौजूदगी में राजस्व विभाग ने पैमाइश कर पूरी जमीन को सरकारी कब्जे में ले लिया.

जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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