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एनर्जी सेक्टर में बड़ा धमाका: ₹75,000 करोड़ निवेश करेगी इंडियन ऑयल, साल के अंत तक बढ़ेगी रिफाइनिंग की ताकत!

अगले कुछ सालों में भारत के पेट्रोलियम प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट, जो वित्त वर्ष में 44.4 बिलियन डॉलर था, उसमें एकचौथाई की बढ़ोतरी हो सकती है. इसका प्रमुख कारण है कि दिसंबर 2026 तक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अब तक के सबसे बड़े एक्सपेंशन प्रोग्राम के तहत नई रिफाइनिंग कैपेसिटी शुरू हो जाएगी. सरकारी तेल कंपनी की क्षमता में बढ़ोतरी से इसकी रिफाइनिंग क्षमता मौजूदा 80.75 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़कर रिकॉर्ड 98.05 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष होने की उम्मीद है.

एनर्जी सेक्टर में बड़ा धमाका: ₹75,000 करोड़ निवेश करेगी इंडियन ऑयल, साल के अंत तक बढ़ेगी रिफाइनिंग की ताकत!

IOCL के एक सीनियर अधिकारी ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि घरेलू जरूरतें पूरी करने के बाद हमारे पास जो भी अतिरिक्त क्षमता बचेगी, हम उसे एक्सपोर्ट करने पर विचार करेंगे. इसमें हमारे एक्सपोर्ट हिस्सेदारी को मौजूदा 5 फीसदी से बढ़ाकर कुल रेवेन्यू का लगभग 15 फीसदी तक ले जाने की क्षमता है. हालांकि, हम किसी तय एक्सपोर्ट टारगेट के साथ काम नहीं करते हैं, और हमारी प्राथमिकता हमेशा घरेलू बाजार ही रहती है.

ये है पूरी प्लानिंग

75,000 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में अब तक ₹53,500 करोड़ से ज़्यादा खर्च किए जा चुके हैं. इस प्रोजेक्ट में पानीपत, वडोदरा और बरौनी रिफाइनरीज शामिल हैं. इनकी कैपेसिटी को क्रमशः 15 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 25 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष, 13.7 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 18 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष और 6 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष किया जा रहा है. इन तीनों प्रोजेक्ट्स के नवंबरदिसंबर 2026 तक चालू होने की योजना है.

भारत के रिफाइनिंग सेक्टर की मौजूदा इंस्टॉल्ड क्षमता लगभग 258.1 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जबकि घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की खपत लगभग 239 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है. हालांकि, रिफाइनरीज आमतौर पर अपनी क्षमता के 105115 फीसदी पर काम करती हैं, जिससे सालाना रियल प्रोडक्शन लगभग 300 मिलियन टन तक पहुंच जाता है. लगभग 61.5 मिलियन टन का अतिरिक्त उत्पादन एक्सपोर्ट कर दिया जाता है. इस वजह से भारत रिफाइंड फ्यूल के दुनिया के सबसे बड़े सप्लायर्स में से एक बन गया है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज करता है सबसे ज्याद एक्सपोर्ट

भारत के रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट का लगभग 70 फीसदी हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज से आता है, जो जामनगर में 70 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी सिंगललोकेशन रिफाइनरी चलाती है. आईओसीएल के 2026 के आखिर तक रिफाइनिंग क्षमता में 17.3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष और जोड़ने से, घरेलू मांग पूरी होने के बाद अतिरिक्त प्रोडक्शन का एक बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है. अगर इस अतिरिक्त प्रोडक्शन का निर्यात किया जाता है, तो इससे भारत के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में काफी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे देश की स्थिति एक ग्लोबल रिफाइनिंग हब के तौर पर मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा की कमाई भी बढ़ेगी.

भारत दुनिया के सबसे बड़े सप्लायर्स में से एक

एक सीनियर अधिकारी ने ईटी की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि अगर भारत में मांग काफी बढ़ जाती है, तो हो सकता है कि हमारे पास रिफाइनिंग सिस्टम से लगातार एक्सपोर्ट के लिए बहुत ज़्यादा सरप्लस न बचे. अपनी ज़रूरत का 90 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करने के बावजूद, भारत रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बनकर उभरा है. वह अपनी बड़ी और जटिल रिफाइनरीज का इस्तेमाल करके इंपोर्टेड कच्चे तेल को घरेलू खपत और विदेशी बाजारों, दोनों के लिए प्रोसेस करता है. यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब ग्लोबल रिफाइनिंग क्षमता में बढ़ोतरी सीमित है और रूस तथा मिडिल ईस्ट में रुकावटों के कारण रिफाइनिंग मार्जिन को सपोर्ट मिल रहा है.

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