
लखनऊ,अमृत विचार उत्तर प्रदेश के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और फास्ट फूड प्रतिष्ठानों में अब खानपान की गुणवत्ता को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने निरीक्षण के नए मानक तय किए हैं, जिसके तहत अब एक ही किचन में शाकाहारी और मांसाहारी भोजन नहीं तैयार किए जा सकेंगे। दोनों के लिए पूरी तरह अलग व्यवस्था होना अनिवार्य कर दिया गया है। अधिकारियों की टीमें अब प्रतिष्ठानों के औचक निरीक्षण के दौरान खाद्य लाइसेंस, किचन, स्टोरेज, साफसफाई, ड्रेनेज और संदूषण रोकने की व्यवस्था की बारीकी से जांच करेंगी। यह भी देखा जाएगा कि प्रतिष्ठान ने अपने कारोबार के अनुरूप वैध लाइसेंस लिया है या नहीं। इसके अलावा किचन, डाइनिंग एरिया और भंडारण क्षेत्र की दीवारों, फर्श और जल निकासी व्यवस्था की भी पड़ताल होगी।
कच्चे मांस के लिए अलग उपकरण जरूरी
मांसाहारी भोजन परोसने वाले प्रतिष्ठानों में कच्चे मांस, पोल्ट्री और सीफूड के लिए अलग क्षेत्र होना चाहिए। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि मांस काटने के लिए अलग कटिंग बोर्ड, बर्तनों और चाकुओं का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। कच्चे मांस के संपर्क में आने वाली सतहों की नियमित धुलाई और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था होना भी अनिवार्य है।
क्रॉस कंटामिनेशन रोकने पर फोकस
विभाग का मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक और माइक्रोबियल संदूषण को रोकना है। शाकाहारी और मांसाहारी भोजन की तैयारी और पकाने की प्रक्रिया अलग रखने से उपभोक्ताओं को पूरी तरह स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिल सकेगा। मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट: अर्पित शुक्ला



