
नई दिल्ली: NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए धरना-प्रदर्शन की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस को कुछ ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है, जिनमें कथित तौर पर ‘नेपाल-टाइप Gen Z प्लान’ का जिक्र है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन चैट्स के आधार पर प्रदर्शन की रणनीति और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां मोबाइल चैट, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन चैट्स में शामिल लोग कौन थे, उनकी क्या भूमिका थी और क्या इन संदेशों का प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से कोई संबंध था।
दिल्ली पुलिस सूत्रों का यह भी दावा है कि आधुनिक तकनीक की मदद से जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे 2,500 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस के अनुसार, इन लोगों के खिलाफ विभिन्न मामलों में पहले भी कार्रवाई हो चुकी है।
पुलिस का कहना है कि अब तक इस मामले में कुल 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थलों पर लगाए गए कैमरों का उद्देश्य आम प्रदर्शनकारियों की निगरानी नहीं, बल्कि वांछित अपराधियों, फरार आरोपियों और आदतन अपराधियों की पहचान करना है।
वहीं, इस मामले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने पुलिस के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी भी जल्द एक सूची जारी करेगी, जिसमें प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के नाम शामिल होंगे।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस के दावे और विभिन्न पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।



