बीते सप्ताह शेयर बाजार में आई तेज गिरावट का असर देश की सबसे बड़ी कंपनियों पर भी साफ दिखाई दिया. बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में भारी गिरावट के बीच देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 9 के बाजार पूंजीकरण में कुल ₹2.74 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई. इस दौरान सबसे बड़ा झटका निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक HDFC बैंक को लगा, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर अकेली ऐसी कंपनी रही, जिसका मार्केट कैप बढ़ा.

पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,091.68 अंक यानी 2.67% टूट गया. वहीं, एनएसई निफ्टी भी 566.85 अंक यानी 2.32% की गिरावट के साथ बंद हुआ. बाजार में बिकवाली का असर बड़े शेयरों पर सबसे ज्यादा देखने को मिला.
HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान
समीक्षाधीन सप्ताह में HDFC बैंक का बाजार पूंजीकरण ₹1,18,383.91 करोड़ घटकर ₹11,43,985.90 करोड़ रह गया. बैंक के शेयर में करीब 9.40% की गिरावट दर्ज की गई. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक के मार्जिन को लेकर बढ़ी चिंताओं की वजह से निवेशकों ने इस शेयर में बिकवाली की.
रिलायंस, SBI और बजाज फाइनेंस भी फिसले
देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप ₹65,429.82 करोड़ घटकर ₹17,29,661.44 करोड़ पर आ गया.वहीं, भारतीय स्टेट बैंक का बाजार पूंजीकरण ₹26,814.94 करोड़ घटकर ₹9,36,953.84 करोड़ रह गया. बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप भी ₹26,802.74 करोड़ घटकर ₹6,30,471.54 करोड़ पर पहुंच गया.
इसके अलावा एलआईसी के बाजार मूल्य में ₹15,116.74 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक में ₹6,223.84 करोड़, भारती एयरटेल में ₹6,021.64 करोड़, टीसीएस में ₹5,191.95 करोड़ और लार्सन एंड टुब्रो में ₹4,092.79 करोड़ की गिरावट दर्ज की गई.
सिर्फ HUL रही फायदे में
जहां अधिकांश दिग्गज कंपनियों के शेयर दबाव में रहे, वहीं हिंदुस्तान यूनिलीवर ने इस ट्रेंड के उलट प्रदर्शन किया. कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹152.73 करोड़ बढ़कर ₹5,03,928.59 करोड़ हो गया. यह टॉप10 कंपनियों में इकलौती कंपनी रही, जिसके निवेशकों को बीते सप्ताह फायदा मिला.
कौन रही सबसे मूल्यवान कंपनी?
बाजार में गिरावट के बावजूद रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही. इसके बाद भारती एयरटेल, HDFC बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज , बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम , लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा.
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते पिछले सप्ताह बाजार दबाव में रहा. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के साथ कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर रहेगी.



