रांची
झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अधीन संचालित झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा परीक्षा में भी पेपर लीक हुआ था।

इसके लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 1212 लाख रुपये की वसूली की गई थी। सिर्फ बोकारो में अभय तिवारी सहित 15 छात्रों को पेपर रटवाया गया था और वहां 15 छात्रों ने 1212 लाख रुपये यानी कुल एक करोड़ 80 लाख रुपये की वसूली हुई थी।
यह वही अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी है, जिसे सीआईडी ने जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। वह जेपीएससी की परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसीी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड का मार्केटिंग मैनेजर है। सीआईडी को पूछताछ में उसने अपने स्वीकारोक्ति बयान में यह खुलासा किया है।
उसने यह भी बताया है कि उक्त जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में वह उत्तीर्ण हुआ था उसका रैंक 48वां था। उसके अलावा उस परीक्षा में उसका भाई अक्षय तिवारी व अक्षय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी का भी चयन हुआ था।
अक्षय तिवारी वर्तमान में महिला बाल विकास धुर्वा में जेएसए व उसकी पत्नी सुषमा निगरानी विभाग में पदस्थापित है। अभय तिवारी भी गिरफ्तारी के समय गोड्डा में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था।
काम करने से मना करने पर जेएएससी ने टीडीपीएल को किया था डीइंपैनल
अभय तिवारी ने अपनी स्वीकारोक्ति बयान में बताया कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के बायोमीट्रिक का काम देखने का काम पहले उसकी कंपनी टीडीपीएल को मिल रहा था। दर कम होने के चलते टीडीपीएल ने मना कर दिया था, इसके बाद जेएसएससी ने टीडीपीएल को डीइंपैनल कर दिया था।
इसके बाद परीक्षा संचालन का काम वेबेल को मिला था। इस कंपनी का मालिक मिथिलेश सिंह पटना का व उसका सहयोगी खूंटी निवासी उमाकांत प्रमाणिक था। वेबेल को ही बायोमीट्रिक के अलावा प्रश्न पत्रों की छपाई का भी काम मिला था।
अभय तिवारी ने दोनों से संपर्क कर परीक्षा का प्रश्न पत्र व उत्तर ले लिया था। बोकारो में जहां प्रश्न व उत्तर रटवाया गया था, वहां मिथिलेश सिंह व उसका सहयोगी राकेश सिंह भी मौजूद थे। वहां कुल 65 प्रश्नों का उत्तर रटवाया गया था। परिणाम पर विवाद व मामला कोर्ट जाने के बाद अभय तिवारी अन्य परीक्षाओं में भी बैठने लगा था।



