IndiaTrending

अतीक अहमद के बेटों अली और उमर को बड़ी राहत; हाईकोर्ट ने दी पैरोल, छोटे भाई अबान की ‘मिट्टी’ में होंगे शामिल

Atiq Ahmed Son Funeral In Prayagraj: माफिया अतीक अहमद के परिवार पर आई त्रासदी के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसके बेटों अली अहमद और मोहम्मद उमर को राहत देते हुए पैरोल मंजूर कर ली है। अदालत ने दोनों भाइयों को अपने छोटे भाई अबान की अंतिम रस्म ‘मिट्टी’ में शामिल होने के लिए अस्थायी पैरोल देने का आदेश दिया है।

अतीक अहमद के बेटों अली और उमर को बड़ी राहत; हाईकोर्ट ने दी पैरोल, छोटे भाई अबान की ‘मिट्टी’ में होंगे शामिल
अतीक अहमद के बेटों अली और उमर को बड़ी राहत; हाईकोर्ट ने दी पैरोल, छोटे भाई अबान की ‘मिट्टी’ में होंगे शामिल

यह याचिका अतीक अहमद की बहन परवीन कुरैशी की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सैयद सफदर अली काज़मी और शादाब अली ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि परिवार पर अचानक आई इस दुखद परिस्थिति को देखते हुए दोनों भाइयों को अंतिम धार्मिक रस्म में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।

झांसी जाते समय हुआ था हादसा

गौरतलब है कि अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा अबान अपने बड़े भाई अली अहमद, जो झांसी जेल में बंद है, उससे मिलने जा रहा था। इसी दौरान उसकी तेज रफ्तार कार सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई, जिसमें अबान की मौत हो गई। हादसे में उसके साथ मौजूद एक अन्य युवक की भी जान चली गई।

अबान की मौत के बाद परिवार ने अली अहमद और मोहम्मद उमर को अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होने की अनुमति देने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दोनों को अबान की ‘मिट्टी’ की रस्म में शामिल होने के लिए पैरोल प्रदान कर दी।

अली अहमद फिलहाल झांसी जेल में बंद है, जबकि मोहम्मद उमर भी न्यायिक अभिरक्षा में है। दोनों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामले लंबित हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अंतिम रस्म में शामिल कराया जाएगा।

आज होगा सुपुर्दएखाक

परिवार की ओर से अबान का सुपुर्दएखाक आज किया जाएगा। इसी में शामिल होने के लिए मोहम्मद उमर और अली अहमद की पैरोल की मांग की गई है। परिवार का कहना है कि यह असाधारण मानवीय परिस्थिति है, इसलिए अदालत से राहत दिए जाने की अपेक्षा है।

जेल में बंद हैं दोनों भाई

का बेटा अली अहमद फिलहाल झांसी जेल में बंद है, जबकि मोहम्मद उमर भी न्यायिक अभिरक्षा में है। दोनों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों की सुनवाई अलगअलग अदालतों में लंबित है। ऐसे में अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply