
Odisha News: ओडिशा की अपराध शाखा (CID-CB) ने करीब ढाई साल पुराने एक ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है. वैज्ञानिक जांच और डीएनए प्रोफाइलिंग की मदद से न केवल मृतक की पहचान की गई, बल्कि हत्या के पीछे की वजह और आरोपियों तक भी जांच एजेंसी पहुंच गई. इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया है.
यह मामला सीआईडी-सीबी थाना केस संख्या-02/2024 से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत उदला थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में दर्ज हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले से हुई थी. उस समय एक सुनसान इलाके में स्थित परित्यक्त कुएं से बोरे में बंद एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ था. शव लंबे समय तक पानी में पड़े रहने के कारण बुरी तरह सड़ चुका था, जिससे उसकी पहचान करना संभव नहीं हो सका.
जांच टीम ने दोबारा की थी पड़ताल
बाद में मामले की जांच सीआईडी-सीबी को सौंपी गई. जांच टीम ने घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की दोबारा पड़ताल की और तकनीकी व वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया. अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्रों से दर्ज सभी गुमशुदगी के मामलों का मिलान किया. इस प्रक्रिया में दो संभावित व्यक्तियों की पहचान की गई, जिनके परिवारों के रक्त नमूने डीएनए परीक्षण के लिए भेजे गए.
29 जून 2026 को आई डीएनए रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि कुएं से मिला शव मयूरभंज जिले के उदला थाना क्षेत्र के सुखुआ साही गांव निवासी जुबुराज सिंह का था. मृतक की पहचान उसके बेटे बिस्वनाथ सिंह के डीएनए से मेल खाने के बाद सुनिश्चित हुई.
कथित तांत्रिक अनुष्ठान के लिए बुलाया गया था
जांच के दौरान सामने आया कि घटना से पहले जुबुराज सिंह को बानासाही (डुगुधा) गांव में झाड़-फूंक और कथित तांत्रिक अनुष्ठान के लिए बुलाया गया था. वहां उन्होंने एक भोज में भी हिस्सा लिया था. इसके बाद वह रहस्यमय तरीके से लापता हो गए. कुछ समय बाद उनका शव बोरे में बंद अवस्था में काजू के जंगल के बीच स्थित एक परित्यक्त कुएं से बरामद हुआ था.
सीआईडी-सीबी की जांच में खुलासा हुआ कि गांव के कुछ लोगों को शक था कि जुबुराज सिंह कथित रूप से जादू-टोना करते थे. आरोपियों का मानना था कि उनकी तांत्रिक गतिविधियों के कारण ही एक बच्चे की मौत हुई थी. इसी अंधविश्वास और शक के चलते उनकी हत्या की साजिश रची गई.
तीन आरोपी गिरफ्तार
जांच एजेंसी ने इस मामले में बानासाही (डुगुधा) गांव के रहने वाले संगौरामोहन सिंह उर्फ बिड़ा सिंह और नरहरि सिंह उर्फ बापी सिंह को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया. दोनों को 2 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर उसी दिन उदला के एसडीजेएम न्यायालय में पेश किया गया. मामले में शामिल एक विधि-विरुद्ध बालक (Child in Conflict with Law) को 3 जुलाई 2026 को बारिपदा स्थित किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
सीआईडी-सीबी अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की गुत्थी सुलझाने में वैज्ञानिक जांच, डीएनए प्रोफाइलिंग और लगातार की गई फील्ड इन्वेस्टिगेशन ने अहम भूमिका निभाई. लंबे समय तक अज्ञात रहे शव की पहचान होने के बाद जांच सही दिशा में आगे बढ़ी और हत्या के पीछे अंधविश्वास से जुड़ा कारण सामने आया.
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि अंधविश्वास और जादू-टोने जैसी मान्यताएं किस तरह गंभीर अपराधों को जन्म दे सकती हैं. साथ ही, आधुनिक फोरेंसिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच की मदद से वर्षों पुराने ब्लाइंड मर्डर मामलों का भी सफलतापूर्वक खुलासा संभव है.



