
गाजियाबाद की ट्रोनिका सिटी थाना पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह मुख्य रूप से गरीब परिवारों को निशाना बनाकर उन्हें पैसों का लालच दे उनके नवजात बच्चे खरीदता था।
गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी थाना पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह गरीब परिवारों को निशाना बनाता था। गिरोह गरीब परिवारों को पैसों का लालच दे उनके बच्चे खरीदता था। आरोपियों ने एक बच्ची का सौदा आंध्र प्रदेश की एक दंपति से किया था। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। गिरोह के सरगना ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। आरोपियों के पास से नकली नोट भी बरामद हुए हैं।
इस गिरोह का भंडाफोड़ एक बच्ची के चोरी हो जाने की शिकायत की छानबीन के दौरान हुआ। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ट्रोनिका सिटी थाना क्षेत्र की पूजा कॉलोनी में रहने वाली हिना की 11 दिन की बच्ची 26 मई को घर से चोरी कर ली गई थी। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से मनोज उर्फ मोनू और पूजा को पकड़ा। आरोपियों ने बेचने से इनकार के बाद बच्ची को चुरा लिया था।
पुलिस ने मनोज उर्फ मोनू और पूजा से सख्ती से पूछताछ की। इसके बाद गिरोह के सुनील कुमार, संजय, राजेंद्र सिंह, पवन कुमार, राबिया, विनीत कुमार, कृष्णा देवी, फरमीना, ज्योति और कुमकुम को दो जून को मंडोला इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के पास से बच्ची भी बरामद हो गई। यह गिरोह बच्ची को आंध्र प्रदेश में रहने वाले एक दंपति को बेचने जा रहा था। पुलिस ने 21 जून को गिरोह के फरार सदस्य नदीम खान को दबोचा। खजूरी दिल्ली के नदीम को खानपुर गांव के पास से गिरफ्तार किया गया।
सहायक पुलिस आयुक्त लोनी सिद्धार्थ गौतम के अनुसार, गिरोह के अनिल लकड़ा निवासी उत्तम नगर दिल्ली, तरन्नुम निवासी जैतपुर बदरपुर दिल्ली और करुणा निवासी गुरुग्राम को ट्रोनिका सिटी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के पास से 500 के पांच नकली नोट और 4 मोबाइल बरामद हुए। पूछताछ में अनिल और करुणा ने बताया कि तरन्नुम और प्रदीप ने दोनों को गिरोह में जुड़वाया। दोनों बच्चा होने वाले गरीब दंपति की तलाश करते और उनको ढाई से 3 लाख रुपयों का लालच देकर खरीदने की कोशिश करते थे।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरोह के गुर्गे गरीब परिवारों से बच्चे के खरीद की डील फाइनल होने पर गिरोह के सरगना को व्हाट्सऐप पर सूचना देते थे। गिरोह के लोग दंपति को नवजात लेकर उन्हें असली नोटों के बीच नकली नोट सुपुर्द कर फरार हो जाते थे। गरीब परिवार के लोग नकली नोट के कारण पुलिस में शिकायत करने से कतराते थे। गिरोह के अन्य सदस्यों में आरती, राजू, दीप्ति और प्रदीप हैं जिनको गिरफ्तार करने की कोशिशें की जा रही हैं। गिरोह के सरगना मनोज ने पुलिस को पूछताछ में करीब 12 बच्चों को बेचने की बात कबूल की है।



