मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लंबे अंतराल के बाद रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया गया है। आरबीआई गवर्नर ने करीब साढ़े तीन साल बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी का एलान किया है। इस फैसले का सीधा असर बैंक से कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर पड़ने की संभावना है। खासकर होम लोन, वाहन ऋण और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की मासिक किस्त बढ़ सकती है।

रेपो रेट बढ़ने से महंगा होगा कर्ज
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्प अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है और इसका असर ग्राहकों को मिलने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ता है। ऐसे में नए कर्ज लेने वालों के साथसाथ मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन वाले ग्राहकों की ईएमआई भी बढ़ सकती है।
कितनी बढ़ेगी आपकी ईएमआई?
ईएमआई में बढ़ोतरी आपके लोन की रकम, मौजूदा ब्याज दर और बाकी अवधि पर निर्भर करेगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति ने 30 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लिया है, तो ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी उसकी मासिक किस्त पर असर डाल सकती है। हालांकि वास्तविक बढ़ोतरी बैंक द्वारा नई ब्याज दर लागू करने और ग्राहक के लोन की शर्तों के आधार पर तय होगी।
बजट पर बढ़ेगा दबाव
रेपो रेट में वृद्धि का असर सिर्फ ईएमआई तक सीमित नहीं रहता। कर्ज महंगा होने से घर, कार और अन्य बड़ी खरीदारी के लिए लोगों की मासिक वित्तीय योजना प्रभावित हो सकती है। वहीं, दूसरी ओर ब्याज दर बढ़ने से सावधि जमा और अन्य बचत साधनों पर बेहतर ब्याज मिलने की उम्मीद भी बढ़ सकती है।
आरबीआई के इस फैसले के बाद अब बैंक अपनी ब्याज दरों में कितना बदलाव करते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी। ग्राहकों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि नई दर उनके मौजूदा लोन और ईएमआई पर किस तारीख से लागू होगी।



